राम मंदिर ट्रस्ट भंग हो, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच हो: कांग्रेस

Edited By Updated: 26 Jun, 2026 02:38 PM

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कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराई जाए। पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने श्रीराम राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने और उसके पुनर्गठन की...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराई जाए। पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने श्रीराम राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने और उसके पुनर्गठन की भी मांग की। शुक्ला ने आरोप लगाया कि भगवान राम में आस्था रखने वाले लोगों, विशेषकर गांवों और गरीब तबकों से एकत्र किए गए चंदे का दुरुपयोग हुआ है और मामले में असली जिम्मेदार लोगों के बजाय छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि क्या बड़े लोगों की मिलीभगत के बिना कोई छोटा कर्मचारी सीसीटीवी बंद कर इतनी बड़ी राशि की चोरी कर सकता है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मंदिर में नकद चढ़ावे को कम दिखाया जाता था और महिलाओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया। उन्होंने कहा, "यह लोगों की धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात है।

 शुक्ला ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मंदिरों के न्यासों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चंदे और चढ़ावे का इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मामले में हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई कराएं।

शुक्ला ने यह भी मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर उसमें राजनीतिक व्यक्तियों के स्थान पर साधु-संतों और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शामिल किया जाए। राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद सभी नामजद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
 

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