कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- अमेरिका के साथ व्यापार समझौता अबकी बार ट्रंप से हार का प्रमाण

Edited By Updated: 22 Feb, 2026 04:01 PM

congress targets government says trade deal with us is proof of defeat against

अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि यह समझौता 'अबकी बार ट्रंप से हार' का प्रमाण है और अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक शुल्क को रद्द किए जाने के फैसले...

नेशनल डेस्क: अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि यह समझौता ''अबकी बार ट्रंप से हार'' का प्रमाण है और अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक शुल्क को रद्द किए जाने के फैसले के बाद उत्पन्न भ्रम की स्थिति को देखते हुए इसे ''ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए।''

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अंतरिम समझौते की रूपरेखा की शर्तों पर फिर से बातचीत होनी चाहिए और आयात उदारीकरण, विशेष रूप से कृषि उत्पादों के आयात उदारीकरण से संबंधित खंड को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि समझौता लेन-देन पर आधारित होता है, लेकिन भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत केवल दिया ही है।

रमेश ने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में ह्यूस्टन में 'अबकी बार ट्रंप सरकार' का नारा दिया था, लेकिन अंतरिम समझौते की यह रूपरेखा 'अबकी बार ट्रंप से हार' का प्रमाण है।'' कांग्रेस नेता ने पूछा कि दो फरवरी को ऐसा क्या हुआ था कि प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति ट्रंप को व्यापार समझौते की घोषणा करने के लिए ''मजबूर'' करना पड़ा?

रमेश ने आरोप लगाया, ''यह सीधे तौर पर संसद में प्रधानमंत्री पर बाह्य सुरक्षा मोर्चे की विफलताओं को लेकर राहुल गांधी के हमले से जुड़ा है। इसलिए इस समझौते की घोषणा खबरों और सुर्खियों को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा थी।'' कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा में यह कहा गया है कि किसी भी पक्ष की ओर से किसी भी प्रकार के बदलाव की स्थिति में अमेरिका और भारत इस बात पर सहमत हैं कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकते हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुल्क (टैरिफ) में बदलाव किया है, इसलिए भारत को अपनी प्रतिबद्धताओं में बदलाव करने का पूरा अधिकार है। रमेश ने कहा, ''हमने जो पहली प्रतिबद्धता जताई है, वह है खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क कम करना या समाप्त करना। प्रधानमंत्री से हमारी मांग है कि इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए।''

उन्होंने दावा किया कि भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर आयात शुल्क समाप्त करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि संयुक्त बयान में की गई इस प्रतिबद्धता को बदला जाना चाहिए क्योंकि इस बयान के अनुसार, भारत को ऐसा करने का पूरा अधिकार है।

रमेश ने पूछा, ''इस प्रतिबद्धता का सीधा असर सोयाबीन किसानों, मक्का किसानों, फल और मेवा उगाने वाले किसानों तथा कपास किसानों पर पड़ेगा। सबसे पहले इसका प्रभाव जम्मू कश्मीर, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा। फिर संयुक्त बयान में अतिरिक्त उत्पादों का जिक्र है। इसका क्या मतलब है?'' उन्होंने कहा, ''हमारा दूसरा सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री (पीयूष गोयल) को दिसंबर से ही पता था कि उच्चतम न्यायालय का फैसला कभी भी आ सकता है जिसमें कई लोगों का मानना ​​था कि इसे रद्द किया जा सकता है।

जब आपको पता था कि फैसला ट्रंप के खिलाफ जा सकता है, तो आपने इतनी जल्दबाजी में समझौता क्यों किया?'' रमेश ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि इस मुद्दे को लेकर फैली व्यापक भ्रम की स्थिति को देखते हुए इस संयुक्त बयान को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए, हम शर्तों पर पुनर्विचार करें, यह एकतरफा सौदा है। इससे देश के विभिन्न राज्यों में लाखों किसानों के हितों को भारी नुकसान होगा।''

कांग्रेस महासचिव ने पूछा कि एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिकी विदेश मंत्री दावा कर रहे हैं कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है, लेकिन सरकार कह रही है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा, तो इन सभी मुद्दों पर स्पष्टता क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से जो कठिन प्रश्न पूछे जा रहे हैं, वह उन सभी प्रश्नों से बच रहे हैं।

कांग्रेस के एजेंडे पर रमेश ने बताया कि किसान महा चौपाल श्रृंखला की पहली चौपाल 24 फरवरी को भोपाल में, दूसरी सात मार्च को महाराष्ट्र में और तीसरी श्रीगंगानगर में आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा, ''हमारा उद्देश्य किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा करना है।'' रमेश ने कहा, ''प्रधानमंत्री को 2021 में तीन काले कृषि-विरोधी कानून वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हम जो भी समझौता करें, उसमें किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहें।'' ट्रंप द्वारा शुल्क में बदलाव पर रमेश ने कहा कि भारी भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए सबसे उचित कदम यह होगा कि इस अंतरिम समझौते को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए और किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शर्तों पर दोबारा बातचीत की जाए।'' 

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