खुलासा: कोविड से संक्रिमत हो चुके बच्चों को लंबे समय तक झेलनी पड़ रही हैं कई बीमारियां

Edited By Anil dev,Updated: 25 Jun, 2022 01:15 PM

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कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने के बाद भी कई लोगों में लॉन्ग कोविड-19  की समस्याएं देखी जा रही हैं। ज्यादातर ये समस्याएं वयस्कों में देखी गई हैं

नेशनल डेस्क: कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने के बाद भी कई लोगों में लॉन्ग कोविड-19  की समस्याएं देखी जा रही हैं। ज्यादातर ये समस्याएं वयस्कों में देखी गई हैं। कोरोना से रिकवरी होने के बाद भी कई दिनों तक लोगों में थकान और कमजोरी की समस्याएं आम तौर पर देखी गई हैं, लेकिन अब बच्चों में भी लॉन्ग कोविड के मामले देखे गए हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद भी बच्चों में कई तरह की समस्याएं देखी गई है।

डेनमार्क में एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि बीमारी से रिकवर होने के बाद भी करीब 46 फीसदी बच्चों में कम से कम 2 महीने तक कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं। स्टडी के दौरान शोधकर्ताओं ने डेनमार्क में बच्चों के राष्ट्रीय स्तर के नमूने का इस्तेमाल किया और संक्रमण के पूर्व इतिहास वाले बच्चों के नियंत्रण समूह के साथ कोविड पॉजिटिव मामलों का मिलान किया है। इस रिसर्च को द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल्स में प्रकाशित किया गया है।

लक्षणों पर सबसे बड़ा अध्ययन
अध्ययन के दौरान जनवरी 2020 और जुलाई 2021 के बीच कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए 14 साल से कम उम्र के लगभग 11,000 डेनिश बच्चों के नमूनों की तुलना डेनमार्क के ही उन 33,000 बच्चों के समूह के नमूनों से की जो कभी कोविड पीड़ित नहीं रहे थे। अब तक 14 साल से कम उम्र के बच्चों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों संबंधी का यह सबसे बड़ा अध्ययन है। शोधकर्ताओं ने बताया कि कुछ बीमारियों को लंबे समय तक असर डालने वाले कोविड का लक्षण माना जाता है। इनमें  सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, थकान और पेट दर्द शामिल हैं।

गंभीरता से इलाज की जरूरत
डेनमार्क स्थिति में कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में प्रोफेसर सेलिना किकेनबोर्ग बर्ग ने एक बयान में कहा कि हमारे अध्ययन का समग्र उद्देश्य स्कूल या डे-केयर से अनुपस्थिति के साथ बच्चों और शिशुओं में लंबे समय तक नजर आने वाले कोविड के बाद के लक्षणों को निर्धारित करना था। अध्ययन के निष्कर्षों के बारे में बताते हुए बर्ग ने कहा कि महामारी ने बच्चों-किशोरों के जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। बर्ग ने अपने बयान में कहा कि बच्चों में लांग कोविड के लक्षण नजर आने की संभावना कम है लेकिन इनकी पहचान करके गंभीरता से इलाज किए जाने की जरूरत है। उन्होंने सभी बच्चों पर महामारी के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर आगे शोध की जरूरत पर भी जोर दिया है। शोध टीम के मुताबिक कम उम्र के लोगों पर लॉन्ग कोविड के असर संबंधी अधिकांश पिछले अध्ययन किशोरों पर केंद्रित रहे हैं जबकि शिशुओं और छोटे बच्चों को इसमें शामिल नहीं किया जाता रहा है।

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