Edited By Pardeep,Updated: 18 Mar, 2026 11:29 PM

दुनिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। इसी बीच Goldman Sachs के चीफ इकोनॉमिस्ट संतनु सेनगुप्ता ने रुपये को लेकर बड़ी चेतावनी दी है।
बिजनेस डेस्कः दुनिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। इसी बीच Goldman Sachs के चीफ इकोनॉमिस्ट संतनु सेनगुप्ता ने रुपये को लेकर बड़ी चेतावनी दी है।
“95 तक गिर सकता है रुपया” – एक्सपर्ट की चेतावनी
ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में संतनु सेनगुप्ता ने कहा कि अगले एक साल में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95 तक कमजोर हो सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव इसका बड़ा कारण है।
क्रूड ऑयल बना सबसे बड़ा कारण
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। इससे ग्लोबल ऑयल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में भारत का आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाते (Current Account) पर दबाव बढ़ेगा और रुपया कमजोर होता जाएगा।
रिकॉर्ड लो पर पहुंचा रुपया
हाल ही में करेंसी मार्केट में रुपया गिरकर 92.63 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले 92.47 का लो-लेवल था, जिसे अब पार कर लिया गया। यह अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर माना जा रहा है।
महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर
एक्सपर्ट के अनुसार अगर तेल की कीमतें ऊंची रहीं, तो महंगाई बढ़ सकती है। रुपया कमजोर होने से आयात महंगा होगा।
RBI को उठाने होंगे कड़े कदम
Reserve Bank of India (RBI) को इस स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, जैसे ब्याज दरों में बदलाव और बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाना।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
रुपये के कमजोर होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा:
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पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है
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ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ेगा
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विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी होगी
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आयातित सामान (इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी आदि) महंगे हो जाएंगे
भारत पर ज्यादा असर क्यों?
भारत अपनी जरूरत का करीब 80% कच्चा तेल आयात करता है। रुपया गिरने पर तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, इससे फ्यूल प्राइस बढ़ने का खतरा रहता है।
क्यों अहम है यह चेतावनी?
रुपया अगर 95 तक पहुंचता है, तो यह ऐतिहासिक गिरावट होगी। इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। महंगाई और आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा।