Edited By Pardeep,Updated: 03 Jun, 2026 11:01 PM

भारतीय रेलवे की लेट-लतीफी अक्सर यात्रियों के लिए जी का जंजाल बन जाती है, लेकिन अब रेलवे की इस लापरवाही पर राजस्थान की एक कंज्यूमर कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है।
नेशनल डेस्कः भारतीय रेलवे की लेट-लतीफी अक्सर यात्रियों के लिए जी का जंजाल बन जाती है, लेकिन अब रेलवे की इस लापरवाही पर राजस्थान की एक कंज्यूमर कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। कोर्ट ने ट्रेन देरी से चलने के कारण एक कपल को हुई भारी परेशानी और आर्थिक नुकसान के बदले रेलवे पर 69,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो अक्सर ट्रेन की देरी का खामियाजा भुगतते हैं।
हसीन सपने पर रेलवे ने फेरा पानी
मामला दिसंबर 2017 का है, जब कोटा निवासी अनिल राणा और उनकी पत्नी अनीता राणा ने केरल घूमने का मन बनाया था। उन्होंने दिल्ली से तिरुवनंतपुरम जाने के लिए करीब 34,000 रुपये खर्च कर फ्लाइट बुक की थी और दिल्ली पहुंचने के लिए राजधानी एक्सप्रेस का सहारा लिया। लेकिन उन्हें क्या पता था कि रेलवे की 'रफ्तार' उनके सफर का मजा किरकिरा कर देगी।
4 घंटे की देरी और हजारों का 'फटका'
राजधानी एक्सप्रेस को दोपहर 12:40 बजे दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचना था, लेकिन वह शाम 4:50 बजे पहुंची। महज 4 घंटे की इस देरी की वजह से कपल की फ्लाइट मिस हो गई। इसके बाद उन्हें न केवल दिल्ली में होटल बुक करना पड़ा, बल्कि अगली फ्लाइट के लिए 72,930 रुपये की मोटी रकम भी खर्च करनी पड़ी। इस पूरी भागदौड़ और अनिश्चितता ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से भी बुरी तरह थका दिया।
कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
हार मानकर बैठने के बजाय कपल ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्ता आयोग ने अगस्त 2023 में अपना फैसला सुनाया और रेलवे को आदेश दिया कि वह कपल के नुकसान की भरपाई करे।
- फ्लाइट का खर्च: 39,001 रुपये।
- मानसिक पीड़ा का मुआवजा: 20,000 रुपये।
- होटल और मुकदमा खर्च: 10,000 रुपये।
- कुल मुआवजा: 69,000 रुपये।
विदेशों में हैं सख्त नियम, आप भी जानें अधिकार
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूरोपीय देशों में ट्रेन की देरी पर यात्रियों को टिकट का 25% से 50% तक रिफंड मिलता है। यदि रेलवे की लापरवाही से आपकी भी फ्लाइट या कोई अन्य जरूरी काम छूटता है और आपको नुकसान उठाना पड़ता है, तो आप भी कंज्यूमर कोर्ट का रुख कर सकते हैं। यह फैसला यह साबित करता है कि सही कानूनी रास्ते से आप अपने नुकसान का मुआवजा पा सकते हैं।