Varuthini Ekadashi Vrat Katha: जब भालू ने चबा डाला था राजा मांधाता का पैर, जानें व्रत कथा और महत्व

Edited By Updated: 09 Apr, 2026 02:23 PM

varuthini ekadashi vrat katha

Varuthini Ekadashi Vrat Katha 2026: जानें, वरुथिनी एकादशी 2026 की सही तिथि (13 अप्रैल), राजा मांधाता की पौराणिक व्रत कथा और भगवान वराह की पूजा विधि। इस दिन राज पंचक भी शुरू हो रहा है, जानें क्या करें और क्या न करें।

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 13 अप्रैल को पड़ रही है। 13 अप्रैल 2026 को ही राज पंचक शुरू हो रहा है। एकादशी के साथ पंचक का योग व्रत के प्रभाव को बढ़ा देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'वरुथिनी' का अर्थ है 'कवच' और यह व्रत साधक के लिए एक अभेद्य सुरक्षा चक्र की तरह काम करता है, जो उसे हर प्रकार की नकारात्मकता और पापों से बचाता है। इस दिन भगवान विष्णु के 'वराह' अवतार की विशेष पूजा का विधान है।

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10 हजार वर्षों की तपस्या के समान फल
शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी की महिमा का बखान करते हुए बताया गया है कि जो फल एक तपस्वी को दस हजार वर्षों की कठिन तपस्या से प्राप्त होता है, वही फल एक श्रद्धालु को सच्चे मन से वरुथिनी एकादशी का उपवास रखने से मिल जाता है। यह व्रत न केवल शारीरिक शुद्धि करता है, बल्कि मानसिक शांति और परिवार में सुख-समृद्धि का संचार भी करता है।

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पौराणिक कथा: राजा मांधाता और भालू का हमला
इस व्रत के महत्व से जुड़ी एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक कथा है। प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर राजा मांधाता राज करते थे, जो अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार जब राजा वन में घोर तपस्या कर रहे थे, तभी एक जंगली भालू ने उन पर आक्रमण कर दिया और उनके पैर को चबाना शुरू कर दिया।

राजा अपनी तपस्या की मर्यादा नहीं तोड़ना चाहते थे, इसलिए उन्होंने भालू पर प्रहार करने के बजाय मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण किया। भक्त की पुकार सुनते ही प्रभु नारायण वहां प्रकट हुए और अपने सुदर्शन चक्र से उस भालू का वध कर दिया। हालांकि, राजा का पैर गंभीर रूप से घायल हो चुका था। राजा को दुखी देख भगवान ने उन्हें वैशाख कृष्ण एकादशी (वरुथिनी) का व्रत करने का निर्देश दिया और बताया कि मथुरा में भगवान वराह की प्रतिमा की पूजा करने से उनका अंग पुनः स्वस्थ हो जाएगा। राजा ने वैसा ही किया और प्रभु की कृपा से उनका पैर पहले की तरह सुंदर और निरोगी हो गया।

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व्रत के नियम: खान-पान में बरतें ये सावधानी
वरुथिनी एकादशी के व्रत में सात्विकता का पालन अनिवार्य है। व्रत का पूर्ण लाभ लेने के लिए कुछ नियमों का पालन करें:

अनाज और नमक का त्याग: इस दिन किसी भी प्रकार के अन्न, दाल या साधारण नमक का सेवन वर्जित माना गया है।

शुद्ध सात्विक भोग: व्रत के दौरान ताजे फल, मेवे, दूध और साबूदाना खिचड़ी का ही सेवन करें।

घर का बना भोजन: बाजार के डिब्बाबंद जूस या चिप्स के बजाय घर पर तैयार फलाहार को प्राथमिकता दें।

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