Edited By Rohini Oberoi,Updated: 18 Jun, 2026 03:39 PM

कहते हैं कि बेटियां माता-पिता के कलेजे का टुकड़ा और घर की लक्ष्मी होती हैं लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने इसे एक कदम आगे बढ़कर साबित किया है। फादर्स डे (Father's Day) से ठीक पहले, इन दो लाडलियों ने अपने पिता की जिंदगी बचाने के लिए जो...
Daughters of India : कहते हैं कि बेटियां माता-पिता के कलेजे का टुकड़ा और घर की लक्ष्मी होती हैं लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने इसे एक कदम आगे बढ़कर साबित किया है। फादर्स डे (Father's Day) से ठीक पहले, इन दो लाडलियों ने अपने पिता की जिंदगी बचाने के लिए जो त्याग और साहस दिखाया है उसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। जब डॉक्टरों ने पिता को बचाने के लिए लीवर और किडनी दोनों के तुरंत ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) की बात कही तो दोनों बहनें बिना एक पल गंवाए खुद डोनर बन गईं और मौत के मुंह से अपने पिता को सुरक्षित खींच लाईं।
बता दें कि गाजियाबाद के मोरटा गांव के रहने वाले 45 वर्षीय जयंत त्यागी (जो कारोबारी हैं और भाजपा के पूर्व सेक्टर संयोजक भी रह चुके हैं) पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। तीन महीने पहले जब उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई तो नोएडा के अस्पताल में जांच कराने पर पता चला कि उनके लीवर और किडनी दोनों गंभीर रूप से खराब हो चुके हैं। डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अगर जल्द ही नया लीवर और किडनी नहीं मिली तो जयंत त्यागी की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। इस खबर से पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
'पापा नहीं तो कुछ भी नहीं...' ढाल बनीं दो लाडलियां
इस मुश्किल घड़ी में जयंत त्यागी की दोनों लाडलियां 22 वर्षीय रिषिका त्यागी (बीटेक पास) और 19 वर्षीय खुशी त्यागी (बीटेक प्रथम वर्ष) ढाल बनकर खड़ी हो गईं। बड़ी बेटी रिषिका ने अपनी एक किडनी और छोटी बेटी खुशी ने अपने लीवर का एक हिस्सा पिता को दान करने का फैसला किया।

जब परिवार ने उनके भविष्य और स्वास्थ्य की चिंता की तो बेटियों ने रोते हुए कहा, अगर हमारे पापा ही इस दुनिया में नहीं रहेंगे, तो हमारा करियर, हमारी पढ़ाई और यह सब कुछ हमारे लिए अर्थहीन हो जाएगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर मां अंगदान करती हैं और कल को उनकी तबीयत बिगड़ गई तो पूरे घर को कौन संभालेगा।
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होने वाले ससुराल ने भी बढ़ाया बड़ी बेटी का हौसला
इस कहानी का सबसे खूबसूरत और समाज को प्रेरणा देने वाला पहलू बड़ी बेटी रिषिका से जुड़ा है। रिषिका की शादी अगले कुछ महीनों में होने वाली है। आमतौर पर समाज में ऐसे मामलों के बाद शादी टूटने का डर रहता है लेकिन जब रिषिका ने अपने होने वाले ससुराल पक्ष को पिता के अंगदान के फैसले के बारे में बताया तो उन्होंने जो किया वो तारीफ के काबिल है:

लड़के वालों ने रिषिका के इस फैसले का न केवल पूरा समर्थन किया बल्कि उसकी हिम्मत की तारीफ करते हुए कहा कि माता-पिता के लिए ऐसा त्याग करने वाली बहादुर बेटी को अपने घर की बहू बनाते हुए उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।
नोएडा के अस्पताल में सफल ऑपरेशन
मेडिकल जांच में दोनों बेटियां पिता के लिए सबसे उपयुक्त डोनर पाई गईं। इसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके ऑपरेशन शुरू किया गया। नोएडा के एक नामचीन निजी अस्पताल में डॉक्टरों की स्पेशल टीम ने कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद किडनी और लीवर का ट्रांसप्लांट एक साथ सफलतापूर्वक पूरा किया।

डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा है। बड़ी बेटी रिषिका अब पूरी तरह सामान्य है। वहीं पिता जयंत त्यागी और छोटी बेटी खुशी को डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में आईसीयू (ICU) में रखा गया है। तीनों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है और जल्द ही बेटियों को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।
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पूरा देश और सोशल मीडिया कर रहा है सलाम
जैसे ही यह खबर बाहर आई अस्पताल में जयंत त्यागी के भाई अमित रंजन और भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल सहित बड़ी संख्या में लोग और कार्यकर्ता बेटियों का हौसला बढ़ाने पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी लोग इस कहानी को शेयर करते हुए लिख रहे हैं कि आज के दौर में जहां लोग रिश्तों को भूल रहे हैं वहीं इन दोनों बहनों ने कलयुग में 'श्रवण कुमार' बनकर बेटियों का नाम पूरे संसार में ऊंचा कर दिया है।