Edited By Ramanjot,Updated: 18 Feb, 2026 08:39 PM

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख संस्था Delhi Commission for Women (DCW) को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
नेशनल डेस्क: दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख संस्था Delhi Commission for Women (DCW) को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। Delhi High Court ने आयोग में लंबे समय से खाली पड़े चेयरपर्सन और सदस्यों के पदों पर गंभीर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी संस्था को बिना नेतृत्व और पर्याप्त स्टाफ के निष्क्रिय नहीं छोड़ा जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि DCW महिलाओं को काउंसलिंग, हेल्पलाइन, कानूनी सहायता और संकट हस्तक्षेप जैसी अहम सेवाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे में शीर्ष पदों का खाली रहना चिंताजनक है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि अब तक नियुक्तियों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को तय की गई है।
जनहित याचिका में क्या कहा गया?
यह मामला जनहित याचिका के जरिए अदालत तक पहुंचा। याचिका में दावा किया गया है कि जनवरी 2024 से आयोग प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रहा है। चेयरपर्सन का पद खाली है और पर्याप्त स्टाफ भी मौजूद नहीं है, जिससे फैमिली काउंसलिंग यूनिट, रेप क्राइसिस सेल, क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 जैसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अपराध के आंकड़े और चिंता
याचिका में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले चिंताजनक स्तर पर हैं। ऐसे में आयोग का निष्क्रिय रहना सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
DCW की पूर्व चेयरपर्सन Swati Maliwal के इस्तीफे के बाद से पद खाली है। इसके अलावा, संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त होने से संस्था की कार्यक्षमता और प्रभावित हुई। दिल्ली सरकार ने पहले आयोग को पुनर्सक्रिय करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक ठोस कदम सामने नहीं आए हैं।
अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। आने वाली सुनवाई में यह साफ होगा कि आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी।