Edited By Ramanjot,Updated: 11 Feb, 2026 12:13 AM

भारतीय सेना की युद्धक तैयारियों और आधुनिक युद्ध क्षमताओं को परखने के उद्देश्य से राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित ‘एक्सरसाइज रुद्र शक्ति’ का दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (PVSM, UYSM, AVSM) ने...
नेशनल डेस्क: भारतीय सेना की युद्धक तैयारियों और आधुनिक युद्ध क्षमताओं को परखने के उद्देश्य से राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित ‘एक्सरसाइज रुद्र शक्ति’ का दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (PVSM, UYSM, AVSM) ने निरीक्षण किया।
यह हाई-इंटेंसिटी ऑल-आर्म्स मैन्युवर अभ्यास रुद्र ब्रिगेड द्वारा लाइव फायरिंग के साथ संचालित किया गया, जिसमें बदलते युद्धक्षेत्र परिदृश्यों में इंटीग्रेटेड और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स को अंजाम देने की भारतीय सेना की क्षमता का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया।
‘रुद्र शक्ति’ अभ्यास, इससे पूर्व आयोजित ‘एक्सरसाइज अखंड प्रहार’ का फॉलो-अप है, जिसमें मरुस्थलीय क्षेत्र में नई परिचालन अवधारणाओं और रुद्र ब्रिगेड की युद्धक तैयारियों को परखा गया था। इस अभ्यास के माध्यम से पहले से प्रमाणित क्षमताओं को और अधिक सशक्त तथा परिष्कृत किया गया।
लाइव फायर अभ्यास के दौरान मैकेनाइज्ड फोर्सेज, आर्टिलरी और एयर डिफेंस यूनिट्स के साथ आर्मी एविएशन के ALH-WSI और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का समन्वित उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) और काउंटर-UAS क्षमताओं को भी शामिल किया गया, जिससे भूमि, वायु और डिजिटल डोमेन में बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।
इस अभ्यास ने आधुनिक युद्ध परिदृश्यों में तकनीकी एकीकरण, सटीक फायरपावर और तेज़ निर्णय क्षमता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। समन्वित ऑपरेशन्स के माध्यम से भारतीय सेना की ऑपरेशनल प्रभावशीलता और युद्धक लचीलापन सामने आया।
निरीक्षण के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने ज़मीनी स्तर पर सैनिकों से बातचीत की और उनके उच्च प्रशिक्षण मानकों, पेशेवर दक्षता और परिचालन तत्परता की सराहना की। उन्होंने कम समय में सटीकता, गति और समन्वय के साथ जटिल अभियानों को अंजाम देने की क्षमता के लिए सभी रैंकों की प्रशंसा की।
‘एक्सरसाइज रुद्र शक्ति’ भारतीय सेना के निरंतर परिवर्तन और आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहां संगठनात्मक नवाचार, रणनीतिक विकास और तकनीकी उन्नयन साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह अभ्यास उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना की मिशन-रेडी, तकनीकी रूप से सशक्त और भविष्य-तैयार रहने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।