Edited By Ramanjot,Updated: 17 Feb, 2026 06:10 PM

पवित्र महीना रमजान 2026 अब बेहद करीब है और मुस्लिम समुदाय में चांद देखने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान की शुरुआत चांद (हिलाल) दिखने पर निर्भर करती है।
नेशनल डेस्क: पवित्र महीना रमजान 2026 अब बेहद करीब है और मुस्लिम समुदाय में चांद देखने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान की शुरुआत चांद (हिलाल) दिखने पर निर्भर करती है।
खगोलीय अनुमानों के मुताबिक 18 फरवरी 2026 (बुधवार) की शाम चांद दिखाई देने की संभावना अधिक है। अगर उस दिन चांद नजर आ जाता है तो इशा की नमाज के बाद उसी रात से तरावीह शुरू हो जाएगी और पहला रोजा 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा।
हालांकि यदि 18 फरवरी को चांद नहीं दिखता, तो तरावीह 19 फरवरी की रात से शुरू होगी और पहला रोजा 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को रखा जाएगा। अंतिम फैसला स्थानीय चांद कमेटी की घोषणा के बाद ही माना जाएगा।
चांद देखने का क्या है नियम?
भारत में रमजान की शुरुआत आमतौर पर स्थानीय रूयत-ए-हिलाल कमेटी की पुष्टि या सऊदी अरब की घोषणा के आधार पर तय की जाती है। मौसम विभाग और खगोलीय गणनाओं के अनुसार 17 फरवरी को चांद दिखना मुश्किल माना जा रहा है, जबकि 18 फरवरी को पश्चिमी और उत्तरी भारत में इसके दिखाई देने की संभावना बेहतर है।
लैलतुल क़द्र 2026 कब हो सकती है?
रमजान की सबसे बरकत वाली रात लैलतुल क़द्र मानी जाती है, जिसे शब-ए-क़द्र भी कहा जाता है। यह रमजान के आखिरी दस दिनों की किसी एक विषम रात (21, 23, 25, 27 या 29) में आती है। इस्लामी परंपरा के अनुसार 27वीं रात की संभावना सबसे अधिक मानी जाती है।
यदि रमजान 19 फरवरी से शुरू होता है, तो 27वीं रमजान की रात 15-16 मार्च 2026 को पड़ सकती है। इस रात को कुरआन के नाजिल होने की रात माना जाता है और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
रमजान की खासियत और रूहानी अहमियत
इस्लामी विद्वानों के अनुसार रमजान रहमत, मगफिरत और नजात का महीना है। माना जाता है कि इस महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं, जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शैतानों को कैद कर दिया जाता है।
नफ्ल इबादत का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ जाता है। मस्जिदों में तरावीह की विशेष व्यवस्था की जाती है और लोग सहरी व इफ्तार की तैयारी में जुट जाते हैं।
बाजारों में रौनक, खजूर और सेवईयों की बढ़ी मांग
रमजान के मद्देनजर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। खजूर, सेवईं, फलों और इफ्तार से जुड़ी सामग्री की खरीदारी शुरू हो चुकी है। शाम होते ही सहरी-इफ्तार की दुकानों पर भीड़ नजर आने लगी है। आसपास के इलाकों से लोग खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं।
रमजान में अहम तारीखें और यादगार दिन
रमजान के महीने में कई महत्वपूर्ण इस्लामी शख्सियतों के उर्स और ऐतिहासिक दिन भी मनाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- 3 रमजान – हजरत सैयदा फातिमा जहरा (र.अ.)
- 10 रमजान – हजरत सैयदा खदीजा (र.अ.)
- 17 रमजान – यौम-ए-शोहदाए-बद्र
- 20 रमजान – फतह-ए-मक्का
- 21 रमजान – हजरत अली (र.अ.) का शहादत दिवस
इन अवसरों पर मस्जिदों और घरों में कुरआन ख्वानी, फातिहा और विशेष दुआओं का आयोजन किया जाता है।
क्या करें अभी?
उलेमा और शहर काजी ने लोगों से अपील की है कि 18 फरवरी की शाम चांद देखने की कोशिश करें और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।