दिल्ली-हरियाणा के रेलवे स्टेशनों पर लगे खुफिया कैमरों की लाइव फीड जा रही थी पाकिस्तान! पुलिस ने खोला सनसनीखेज नेटवर्क

Edited By Updated: 24 Mar, 2026 10:21 AM

delhi haryana hidden cameras at railway stations intelligence agencies bank

आधुनिक तकनीक और शातिर दिमाग के मेल ने देश की सुरक्षा के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे सनसनीखेज जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। दिल्ली और हरियाणा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर...

नई दिल्ली/गाजियाबाद: आधुनिक तकनीक और शातिर दिमाग के मेल ने देश की सुरक्षा के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे सनसनीखेज जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। दिल्ली और हरियाणा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर खुफिया कैमरे लगाकर उनकी सीधी 'लाइव फीड' पाकिस्तान भेजी जा रही थी। यानी हमारे स्टेशनों की हर हलचल पर सीमा पार से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही थी।

पंचर की दुकान और जासूसी का नेटवर्क
इस पूरे खेल का केंद्र फरीदाबाद का एक गांव निकला, जहां नौशाद अली नाम का शख्स पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने की दुकान चलाता था। पुलिस की जांच में सामने आया कि बिहार का रहने वाला नौशाद दरअसल कोलकाता से खास तौर पर इस मिशन के लिए बुलाया गया था। पंचर की दुकान तो महज एक पर्दा थी, जिसका असली मकसद सुरक्षा घेरे में सेंध लगाना था। नौशाद और उसके साथी रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील सैन्य इलाकों की तस्वीरें और वीडियो व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान भेजते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि महज एक फोटो या वीडियो के लिए उन्हें 4 से 6 हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा था।

50 सोलर कैमरों का 'साइलेंट' प्लान
पकड़े गए आरोपियों के इरादे कितने खतरनाक थे, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों में 50 ऐसे सोलर कैमरे लगाने की फिराक में थे जिन्हें बिजली की जरूरत भी नहीं पड़ती। ये कैमरे धूप से चार्ज होकर लगातार डेटा भेजने में सक्षम थे। पुलिस ने दिल्ली और सोनीपत से कुछ कैमरे बरामद भी किए हैं, जो पहले ही इंस्टॉल किए जा चुके थे। अब जांच इस दिशा में मुड़ गई है कि क्या इस बड़ी साजिश में रेलवे का कोई अंदरूनी कर्मचारी भी शामिल था।

सुरक्षा तंत्र को बड़ी चुनौती
गाजियाबाद पुलिस अब तक इस गिरोह के सरगना सुहेल समेत 22 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पकड़े गए लोगों में मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग भी शामिल है, जो इस नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है। पुलिस अब इनके बैंक खातों और डिजिटल चैट्स की बारीकी से जांच कर रही है ताकि फंडिंग के असली स्रोत तक पहुंचा जा सके। इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि दुश्मन अब तकनीक का इस्तेमाल कर हमारे सार्वजनिक स्थलों को निशाना बना रहे हैं। फिलहाल एक बड़ा खतरा टल गया है, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब भी हाई अलर्ट पर हैं।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!