दिल्ली शराब नीति मामला : हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे केजरीवाल

Edited By Updated: 15 Mar, 2026 09:37 PM

kejriwal moves supreme court after setback from high court

आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आबकारी नीति मामले की सुनवाई कर रही बेंच को बदलने की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया था। केजरीवाल...

नेशनल डेस्क : आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आबकारी नीति मामले की सुनवाई कर रही बेंच को बदलने की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया था। केजरीवाल ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय के फैसले को पलटने की मांग की है।

केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं ने एक पत्र के माध्यम से कोर्ट को बताया था कि उन्हें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है। उन्होंने जस्टिस शर्मा के 9 मार्च के आदेश का हवाला दिया, जिसमें CBI को अंतरिम राहत दी गई थी और जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। केजरीवाल ने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा के कुछ पिछले फैसलों की भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आलोचना की गई है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बेंच बदलने के केजरीवाल के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला मौजूदा रोस्टर के अनुसार जस्टिस शर्मा को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मामले से खुद को अलग करने (recuse) का फैसला संबंधित न्यायाधीश को ही लेना चाहिए और उन्हें बदलाव के लिए कोई ठोस आधार नहीं मिला।

जानें पूरा मामला

यह पूरा विवाद 27 फरवरी, 2026 को निचली अदालत के उस आदेश से शुरू हुआ, जिसमें दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ CBI ने हाई कोर्ट में एक पुनरीक्षण याचिका (revision petition) दायर की थी, जिसकी सुनवाई जस्टिस शर्मा की बेंच कर रही है। अब केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में बेंच बदलने की मांग की है और जस्टिस शर्मा के 9 मार्च के आदेश को भी चुनौती दी है।

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