डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 78 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर से 23 करोड़ की ठगी, साइबर गिरोह ने 7 हफ्ते तक रखा डर के साए में

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 08:16 PM

digital arrest fraud case

राजधानी के दक्षिण दिल्ली इलाके से साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुलमोहर पार्क में रहने वाले 78 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर नरेश मल्होत्रा को साइबर ठगों ने कथित “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर करीब 23 करोड़ रुपये ठग लिए।

नेशनल डेस्क: राजधानी के दक्षिण दिल्ली इलाके से साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुलमोहर पार्क में रहने वाले 78 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर नरेश मल्होत्रा को साइबर ठगों ने कथित “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर करीब 23 करोड़ रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को Mumbai Police, Central Bureau of Investigation और Enforcement Directorate जैसे सरकारी संस्थानों का अधिकारी बताकर उन्हें कई हफ्तों तक मानसिक दबाव में रखा।

टेलीकॉम कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल

जानकारी के अनुसार ठगी की शुरुआत अगस्त 2025 में एक फोन कॉल से हुई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के आधार और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मुंबई में आपराधिक गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है। इसके बाद कॉल को कथित जांच एजेंसियों से जोड़ दिया गया और पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए फर्जी पुलिस अधिकारी, आईडी कार्ड और कथित गिरफ्तारी वारंट दिखाए गए।

‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर किया मानसिक दबाव

ठगों ने मल्होत्रा को बताया कि वे जांच के घेरे में हैं और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में रखा जा रहा है।

उन्हें सख्त निर्देश दिया गया कि वे:

  • घर से बाहर न जाएं
  • फोन हमेशा ऑन रखें
  • किसी से इस मामले में बात न करें

अगर उन्होंने नियम तोड़ा तो तुरंत गिरफ्तारी और जेल की धमकी दी गई। अकेले रहने वाले मल्होत्रा डर के कारण ठगों के निर्देशों का पालन करते रहे।

21 बार में 16 खातों में भेजे करोड़ों रुपये

जांच के नाम पर ठगों ने पीड़ित से कहा कि उनकी संपत्ति को “सुरक्षित” रखने के लिए पैसे सरकारी खातों में ट्रांसफर करने होंगे। डर के कारण मल्होत्रा ने अलग-अलग बैंकों में जाकर 21 बार RTGS के जरिए लगभग 22.92 करोड़ रुपये कुल 16 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बताया गया कि ठग इतने सक्रिय थे कि पीड़ित द्वारा घरेलू खर्च के लिए निकाली गई राशि पर भी उनकी नजर रहती थी।

संपर्क टूटने पर हुआ ठगी का अहसास

सितंबर 2025 के मध्य में जब ठगों का संपर्क अचानक बंद हो गया और पैसा वापस नहीं मिला, तब पीड़ित को ठगी का शक हुआ। इसके बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दर्ज कराई। जांच की जिम्मेदारी Delhi Police की साइबर यूनिट को दी गई।

अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया कि यह मामला एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़ा है। ठगों ने पैसों को छिपाने के लिए 7 अलग-अलग लेयर में 4,000 से अधिक छोटे ट्रांजैक्शन किए। जांच में कुछ डिजिटल लिंक विदेशी ठिकानों, खासकर कंबोडिया से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं।

कई आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों रुपये फ्रीज

अब तक पुलिस ने इस मामले में 5-6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो मनी म्यूल खाते उपलब्ध कराने और फंड ट्रांसफर में शामिल थे। जांच एजेंसियों ने कई बैंक खातों को फ्रीज किया है और करीब 12 करोड़ रुपये तक की रकम ट्रेस या फ्रीज कर ली गई है।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

यह मामला अब Supreme Court of India तक पहुंच चुका है। अदालत की बेंच ने केंद्र सरकार, जांच एजेंसियों और बैंकिंग नियामक Reserve Bank of India से जवाब मांगा है। पीड़ित ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि एक महीने के भीतर उनकी जीवनभर की बचत खत्म हो गई और उनकी कहानी दूसरों के लिए चेतावनी बननी चाहिए।

बढ़ रहा है ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम

यह घटना तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम की ओर इशारा करती है, जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर फोन या वीडियो कॉल के जरिए पैसे ट्रांसफर करने की मांग की जाए तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना पुलिस को दें।

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