Edited By Sahil Kumar,Updated: 19 Mar, 2026 02:17 PM

भारत सरकार का डिजिटल इंडिया प्रोग्राम, जो जुलाई 2015 में शुरू हुआ, देश में इंटरनेट को सस्ता और सुलभ बनाने में सफल रहा है। डेटा की कीमतों में 97% की गिरावट आई और ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ता 25 करोड़ से बढ़कर 103 करोड़ हो गए। मोबाइल कनेक्टिविटी वाले गांव और...
नेशनल डेस्कः भारत सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम ने देश में इंटरनेट को सस्ता, तेज और सबके लिए सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण काम किया है। जुलाई 2015 से अब तक डेटा की कीमतों में 97% की गिरावट दर्ज हुई है, वहीं ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या चार गुना बढ़ी है। इन उपलब्धियों से न केवल डिजिटल सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है, बल्कि डिजिटल समावेशिता और आर्थिक किफायतीपन को भी मजबूती मिली है।
तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच
प्रधानमंत्री के टेक्नोलॉजी को सब तक पहुँचाने के दृष्टिकोण के तहत चल रहे इस कार्यक्रम ने मुख्य रूप से चार क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है: इंटरनेट एक्सेस बढ़ाना, डेटा को किफायती बनाना, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और डिजिटल साक्षरता बढ़ाना।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 18 मार्च 2026 के बयान के अनुसार, इन प्रयासों ने देशभर में डिजिटल सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बढ़ाया और डिजिटल समावेशिता को मजबूत किया।
ब्रॉडबैंड और मोबाइल कनेक्टिविटी में भारी उछाल
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2014-15 में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर केवल 25 करोड़ थे, जो अब 2024-25 में बढ़कर 103 करोड़ तक पहुँच चुके हैं, यानी 400 प्रतिशत वृद्धि। मोबाइल बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) की संख्या 7.9 लाख से बढ़कर 29.5 लाख हो गई है। वहीं, 2G, 3G और 4G कनेक्टिविटी वाले गांवों की संख्या 6.35 लाख तक पहुँच चुकी है, जो लगभग यूनिवर्सल कवरेज के बराबर है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भी 358 किलोमीटर से बढ़कर 6.92 लाख किलोमीटर से अधिक हो गया है।
डेटा सस्ता और उपयोग बढ़ा
भारत में इंटरनेट डेटा की खपत में जबरदस्त वृद्धि हुई है। औसत उपयोग प्रति सब्सक्राइबर 61.66 MB से बढ़कर लगभग 25.25 GB प्रति माह हो गया है। इसी दौरान डेटा की कीमत 269 रुपये प्रति GB से घटकर लगभग 7.9 रुपये तक आ गई है। इस गिरावट ने न केवल इंटरनेट को किफायती बनाया बल्कि आम जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी काफी कम किया।