अच्छे काम की सजा क्यों? जयराम रमेश का केंद्र पर बड़ा हमला, परिसीमन को बताया दक्षिण भारत के खिलाफ साजिश!

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 05:06 PM

don t punish south for population control ramesh slams delimitation

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने परिसीमन के विषय का हवाला देते हुए कहा कि अपनी आबादी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने वाले केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को कम संसदीय सीटों के साथ "दंडित" नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केरल में भारतीय जनता...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने परिसीमन के विषय का हवाला देते हुए कहा कि अपनी आबादी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने वाले केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को कम संसदीय सीटों के साथ "दंडित" नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केरल में भारतीय जनता पार्टी और सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के बीच मौन सहमति होने का भी आरोप लगाया और कहा कि इसके बावजूद कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) इस विधानसभा चुनाव में जीतेगा क्योंकि राज्य बदलाव के लिए तैयार है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने "पीटीआई-भाषा" को दिए साक्षात्कार में केंद्र सरकार पर राज्यों को वित्तीय आवंटन करने में भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि प्रतिनिधित्व और वित्तीय न्याय दोनों केरल तथा तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में भाजपा को घेरने के लिए उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दे होंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या परिसीमन केरल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार का विषय होगा, रमेश ने कहा कि यह एक "बहुत बड़ा मुद्दा" है और अभी जो हालात हैं, उनको देखते हुए केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उनकी सीटों की संख्या में कमी देखी जाएगी। उनका कहना था, "यह एक चिंता का विषय है। यह अभी कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि जनगणना होने वाली है। अगले साल अप्रैल तक, हमें जनगणना के व्यापक नतीजे पता चल जाएंगे। और फिर, निश्चित रूप से एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। लेकिन यह संघवाद का एक बड़ा मुद्दा है।" उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं होना चाहिए कि परिवार नियोजन को लेकर जिम्मेदार और संवेदनशील रहने वाले राज्यों, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों को दंडित किया जाए।"

PunjabKesari

रमेश ने इस बात का उल्लेख किया कि केरल भारत का पहला राज्य है जिसने कुल प्रजनन दर को 2.1 पर लाने का लक्ष्य हासिल किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह करीब 40 साल पहले की बात है। केरल में 1988 में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.1 पर पहुंच गयी थी और वह ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया था। तमिलनाडु ने 1993 में इसे हासिल किया। फिर अविभाजित आंध्र प्रदेश इस पर पहुंचा, उसके बाद कर्नाटक ने इस लक्ष्य को हासिल किया। बाद में, कुछ छोटे राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और अन्य ने भी इसे हासिल किया।" रमेश ने कहा, इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए कि जो राज्य पहले परिवार नियोजन में सफल रहे, उन्हें उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आधार पर दंडित किया जाए।

PunjabKesari

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहकारी संघवाद के बारे में बात तो करते हैं लेकिन टकरावपूर्ण संघवाद अपनाते हैं, सत्ता का केंद्रीकरण करते हैं और राज्यों को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा, "राज्यपालों के काम करने के तरीके को देखें। वे मूल रूप से केंद्र के, भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। केरल के राज्यपाल, तमिलनाडु के राज्यपाल, कर्नाटक के राज्यपाल को देखें। जहां भी विपक्षी सरकारें सत्ता में हैं, वहां विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा का उद्देश्य सत्ता में आना नहीं बल्कि कांग्रेस को जीत से वंचित करना है और इसीलिए एलडीएफ और भाजपा के बीच एक मौन सहमति है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि केरल 10 साल के वामपंथी शासन के बाद बदलाव के लिए तैयार है। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!