Edited By Parveen Kumar,Updated: 20 Apr, 2026 09:26 PM

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का "गला घोंट दिया", जबकि विपक्ष ने केवल परिसीमन विधेयक का विरोध किया...
नेशनल डेस्क : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का "गला घोंट दिया", जबकि विपक्ष ने केवल परिसीमन विधेयक का विरोध किया था। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री के व्यापक प्रचार कार्यक्रम पर तंज कसते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या मोदी राज्य के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। खरगे ने दावा किया कि मोदी काफी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं और अपने आधिकारिक कार्यों की अनदेखी कर रहे हैं।
लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा विधेयक खारिज होने पर प्रधानमंत्री द्वारा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर "भ्रूण हत्या" का आरोप लगाए जाने पर खरगे ने कहा, "आपने (मोदी ने) महिला आरक्षण विधेयक का गला घोंट दिया; हमने परिसीमन विधेयक के खिलाफ लड़ाई लड़ी, न कि महिला आरक्षण के खिलाफ।" खरगे ने कूचबिहार में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उपस्थित लोगों को याद दिलाया कि 2010 में संप्रग सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित किया था। उन्होंने कहा, ''हम हमेशा महिलाओं के अधिकार और कल्याण सुनिश्चित करने के इच्छुक रहे हैं।''
खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास सरोजिनी नायडू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी जैसी महिला नेता रही हैं, क्या भाजपा ने कभी किसी महिला को अपना अध्यक्ष बनाया है या उन्हें किसी ऊंचे पद पर पहुंचाया है। महिला आरक्षण विधेयक 2010 में राज्यसभा से पारित हो गया था, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इसे लोकसभा में पेश नहीं किया और यह स्वत: निरस्त हो गया। रैली में खरगे ने कहा, ''हम (संसद) 2023 में एक साथ आए और महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ, लेकिन मोदी 30 महीने तक सोते रहे और पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जागे।'' उन्होंने सवाल किया कि केंद्र में भाजपा-नेतृत्व वाली राजग सरकार को इसे पहले लागू करने से कौन रोक रहा था।
सितंबर 2023 में संसद ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया, जिसे सामान्यतः महिला आरक्षण कानून कहा जाता है। अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें संशोधन के लिए पिछले सप्ताह लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया, जो खारिज हो गया। साल 2023 के कानून के तहत यह आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं होगा, क्योंकि इसे 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। खरगे ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर परिसीमन विधेयक को पारित कराना चाहती है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "जो खारिज हुआ है, वह परिसीमन विधेयक था।"
उन्होंने दावा किया कि नरेन्द्र मोदी परिसीमन को आगे बढ़ाकर देश में समय से पहले आम चुनाव कराना चाहते हैं। खरगे ने कहा, "आप (मोदी) लोकतंत्र के साथ विश्वासघात करते हैं और फिर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम करने का दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी 2014 में सत्ता में आए, लेकिन महिलाओं को मतदान का अधिकार उससे काफी पहले मिल चुका था। खरगे ने सिलीगुड़ी में एक अन्य रैली को संबोधित करते हुए कहा कि 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित न होना मोदी की हार है। उन्होंने कहा, "यह उनकी विचारधारा की हार है और भाजपा तथा आरएसएस की भी हार है।"
खरगे ने दावा किया कि विधेयक के लोकसभा में पारित न होने के अगले दिन प्रधानमंत्री के 29 मिनट के राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने 29 बार कांग्रेस का जिक्र किया और पार्टी पर विधेयक खारिज कराने का गलत आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक उन निर्वाचन क्षेत्रों को तोड़ने के लिए लाया गया था, जहां कांग्रेस मजबूत है। कूचबिहार में खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के चुनावी भाषणों से शांति भंग हो सकती है और विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा, "मैं मोदी से कहना चाहता हूं कि उनका जादू कहीं और चल सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग इस झांसे में नहीं आएंगे।" कांग्रेस अध्यक्ष ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने कुछ दलों के साथ चुनावी गठबंधन करके "काफी नुकसान" उठाया है।
इस बार कांग्रेस पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अकेले लड़ रही है। इससे पहले 2021 और 2016 में उसने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के साथ गठबंधन किया था, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा था। मोदी पर विपक्ष को खत्म करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा, "देश में लोकतंत्र पूरी तरह जिंदा है और हम इसे जिंदा रखेंगे।" उन्होंने प्रधानमंत्री पर विज्ञापनों के जरिये खुद के प्रचार का आरोप लगाया और पूछा, "अगर वह इतने लोकप्रिय हैं, तो उन्हें विज्ञापनों की जरूरत क्यों है?"
पश्चिम बंगाल पर 8.15 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ होने का जिक्र करते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने राज्य को मिलने वाले दो लाख करोड़ रुपये भी नहीं दिए हैं। सिलीगुड़ी में खरगे ने कहा कि पश्चिम बंगाल पर 1952 से 1977 तक (1967 से 1972 के बीच कुछ अंतराल को छोड़कर) कांग्रेस का शासन रहा, तब यह एक समय प्रगतिशील राज्य था और यहां बड़े उद्योग तथा प्रमुख शैक्षणिक संस्थान जैसे पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) थे।
उन्होंने दावा किया, "लेकिन अब बंगाल भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लड़ाई के कारण बर्बाद हो गया है।" कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस टकराव के चलते राज्य के युवा रोजगार की तलाश में हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। खरगे ने मोदी पर देश की हर संपत्ति बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "केवल हवा ही बची है जिसे अभी तक नहीं बेचा गया, क्योंकि वह उनके हाथ में नहीं है। मोदी के शासन में अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब होते जा रहे हैं।"