Edited By Anil Kapoor,Updated: 22 Apr, 2026 02:12 PM

भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें ऐसी हैं, जिन्हें याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आतंकवाद के काले साए ने समय-समय पर देश के अमन-चैन को चोट पहुंचाने की कोशिश की है। आइए नजर डालते हैं उन 5 बड़े हमलों पर, जिन्होंने ना केवल भारत की सुरक्षा...
नेशनल डेस्क: भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें ऐसी हैं, जिन्हें याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आतंकवाद के काले साए ने समय-समय पर देश के अमन-चैन को चोट पहुंचाने की कोशिश की है। आइए नजर डालते हैं उन 5 बड़े हमलों पर, जिन्होंने ना केवल भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि पूरे देश को गम और गुस्से में डुबो दिया।
1. 1993 मुंबई ब्लास्ट: वो जख्म जिसने पूरी दुनिया को दहला दिया
12 मार्च 1993 का वह दिन मुंबई के लिए किसी कयामत से कम नहीं था। जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में महज कुछ घंटों के भीतर 13 सीरियल बम धमाके हुए। इस खौफनाक मंजर में 250 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान चली गई और हजारों लोग घायल हुए। यह भारत में आतंकवाद का एक ऐसा क्रूर चेहरा था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा।

2. संसद हमला 2001: लोकतंत्र के मंदिर पर चोट और युद्ध की आहट
13 दिसंबर 2001 को आतंकवादियों ने भारत के लोकतंत्र की सबसे पवित्र जगह 'संसद भवन' को निशाना बनाया। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर परिसर में घुसने की कोशिश की। भारतीय सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस दिखाते हुए सभी आतंकियों को ढेर कर दिया, लेकिन इस हमले ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था।

3. 2006 ट्रेन धमाके: जब 11 मिनट में थम गई थी मुंबई की रफ्तार
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों को 11 जुलाई 2006 को निशाना बनाया गया। शाम के समय में मात्र 11 मिनट के भीतर 7 बम धमाके हुए। यात्रियों से खचाखच भरी ट्रेनों में हुए इन विस्फोटों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई। इस हमले ने शहर की रफ्तार को कुछ समय के लिए थाम दिया था, लेकिन मुंबई के जज्बे ने फिर से वापसी की।

4. 26/11 हमला: मुंबई में 60 घंटे का वो खौफनाक आतंकी तांडव
26 नवंबर 2008 को समुद्र के रास्ते आए लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई को बंधक बना लिया था। ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट और सीएसएमटी स्टेशन समेत कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग और धमाके हुए। लगभग 60 घंटों तक चली इस जंग में 166 से अधिक लोग मारे गए। अजमल कसाब को जीवित पकड़ना इस मामले में भारत के लिए बड़ी कामयाबी रही।

5. पुलवामा हमला: जवानों का सर्वोच्च बलिदान और बालाकोट का करारा जवाब
14 फरवरी 2019 को देश उस समय स्तब्ध रह गया जब जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले पर एक आत्मघाती हमला हुआ। विस्फोटक से लदी कार ने जवानों की बस को टक्कर मार दी, जिसमें 40 वीर जवान शहीद हो गए। इस कायरतापूर्ण हमले के जवाब में भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक कर आतंकवाद के खिलाफ अपनी नई नीति का परिचय दिया।