शशि थरूर का केंद्र पर बड़ा हमला, कहा- जानबूझकर महिला आरक्षण को परिसीमन से उलझाया

Edited By Updated: 18 Apr, 2026 05:26 PM

shashi tharoor attacks the centre over women s reservation

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। थरूर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर महिला आरक्षण को 'परिसीमन' (Delimitation) के साथ जोड़ दिया, ताकि...

नेशनल डेस्क: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। थरूर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर महिला आरक्षण को 'परिसीमन' (Delimitation) के साथ जोड़ दिया, ताकि इस मुद्दे को पेचीदा बनाया जा सके।

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थरुर बोले-  देश की एकता और लोकतंत्र का सवाल

संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए थरूर ने कहा, "हमने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई थी। यह देश के भविष्य, भारत की एकता और हमारे लोकतंत्र के लिए एक बुनियादी मुद्दा है। इस पर महज दो दिन के सत्र में नहीं, बल्कि बहुत गंभीर चर्चा की जरूरत है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। थरूर ने कहा कि हमें महिला आरक्षण पास करना चाहिए था, लेकिन परिसीमन नहीं। सरकार ने इन दोनों को जानबूझकर एक साथ जोड़ दिया, जो गलत था। हम बिना किसी देरी के 33% महिला आरक्षण तुरंत लागू करने को तैयार हैं। अगर सरकार मानसून सत्र में बिना किसी शर्त के नया बिल लाती है, तो हम उसे पास करा देंगे।"

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 कुमारी शैलजा ने भी बोला तीखा हमला

कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस संवेदनशील मुद्दे पर देश में भ्रम फैला रही है और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। शैलजा ने कहा, "जब 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पारित हो चुका था, तो अब तक सरकार क्या कर रही थी? सत्र की अधिसूचना भी एक रात पहले रात 10 बजे जारी की गई।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि महिलाओं की आड़ में केंद्र सरकार देश के साथ खिलवाड़ कर रही है और इसमें सिर्फ राजनीति छिपी है।

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विपक्ष पर दोष मढ़ना गलत

शैलजा ने स्पष्ट किया कि बिल गिरने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराना गलत है, क्योंकि कांग्रेस और अन्य दलों ने पहले ही इस बिल का (2023 में) समर्थन कर दिया था। विवाद केवल सरकार द्वारा लगाई गई नई शर्तों (परिसीमन और जनगणना) को लेकर है।

 

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