Edited By Pardeep,Updated: 29 Oct, 2026 10:55 PM

मध्य और पूर्वी यूरोप (CEE) के साथ भारत के कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
नई दिल्ली : मध्य और पूर्वी यूरोप (CEE) के साथ भारत के कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क लगभग 100 कंपनियों के एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली पहुंचे। वर्ष 2010 के बाद किसी पोलिश प्रधानमंत्री की यह पहली भारत यात्रा है। पोलिश पीएम का यह दौरा अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान स्थापित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।
'मदर ऑफ ऑल डील्स': भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता
पोलिश प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच तय हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा गया है। यह समझौता 27 जनवरी 2026 को संपन्न हुआ था और 16 दिसंबर को ब्रुसेल्स में इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। यह समझौता दुनिया की लगभग एक-चौथाई जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है। इस समझौते के लागू होने के बाद वर्ष 2032 तक भारत को यूरोपीय संघ के सामानों का निर्यात दोगुना होने का अनुमान है, जिसमें 96.6 प्रतिशत वस्तुओं पर सीमा शुल्क (टैरिफ) खत्म या कम हो जाएंगे।
व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य और रक्षा-तकनीक में सहयोग
भारत और पोलैंड ने वर्तमान में लगभग 6 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग में संवाद शुरू करने के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। व्यापारिक सहयोग के तहत भारतीय सेना को पोलिश सैन्य ड्रोन की बिक्री और भारत की जेबीएम ऑटो (JBM Auto) के साथ पोलिश कंपनी सोारिस (Solaris) का इलेक्ट्रिक बस संयुक्त उद्यम इस साझेदारी के प्रमुख उदाहरण हैं।
G20 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में परस्पर समर्थन
इस उच्चस्तरीय यात्रा का एक बड़ा कूटनीतिक परिणाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर परस्पर सहयोग के रूप में सामने आया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री टस्क के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 में पोलैंड के लिए स्थायी स्थान के प्रयासों का समर्थन करने का आश्वासन दिया है। इसके बदले में पोलैंड ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता और वर्ष 2028-29 के लिए गैर-स्थायी सीट की उम्मीदवारी के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।
'डी-रिस्किंग और डाइवर्सिफाइंग' की कूटनीतिक रणनीति
वैश्विक व्यापार और टैरिफ नीतियों में आ रहे बदलावों के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर 2026 में वारसॉ में यूरोप के साथ भारत के जुड़ाव को 'डी-रिस्किंग और डाइवर्सिफाइंग' (जोखिम कम करने और विविधीकरण) की रणनीति बताया था। बर्लिन या पेरिस के अलावा सीधे वारसॉ और विसेग्राद समूह से जुड़कर भारत मध्य और पूर्वी यूरोप को अपने आप में एक महत्वपूर्ण और स्वतंत्र भागीदार के रूप में देख रहा है।