'अमीरों के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं'; कारोबारी के बयान से भूचाल, सवाल उठे तो दिया करारा जवाब

Edited By Updated: 09 Jun, 2026 02:03 PM

entrepreneur says india offers better life for the wealthy

एक उद्यमी के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बहस छेड़ दी है कि क्या अमीर लोगों के लिए भारत विदेशों से बेहतर है। समर्थकों ने भारत के अपनापन और जीवनशैली की तारीफ की, जबकि आलोचकों ने प्रदूषण, ट्रैफिक और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया...

International Desk: क्या करोड़ों की संपत्ति रखने वाले लोगों के लिए भारत में रहना विदेशों में बसने से बेहतर है? यह सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। उद्यमी और लेखक संदीप मॉल (Sandeep Mall) के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।  दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले संदीप मॉल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जो लोग नौकरी, करियर या बेहतर अवसरों के लिए विदेश जाते हैं, उनकी वजह समझ में आती है। लेकिन जिन लोगों के पास पर्याप्त धन-संपत्ति है, उनके लिए भारत में जीवन कहीं अधिक आरामदायक और सुविधाजनक हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) विदेशों में बसना क्यों पसंद करते हैं।

 

आलोचकों ने उठाए सवाल
संदीप मॉल की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने कहा कि भारत में पैसा होने के बावजूद कुछ समस्याओं से बचना मुश्किल है। बेंगलुरु के टेक प्रोफेशनल शांतनु गोयल ने लिखा कि अमीर और गरीब दोनों को खराब सड़कों, ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, करोड़पति भी सड़क पर निकलने के बाद उन्हीं चुनौतियों से जूझते हैं जिनसे आम नागरिक जूझता है। एक अन्य यूजर नितिन सिन्हा ने कहा कि आलीशान गेटेड सोसायटी के अंदर जिंदगी भले ही आरामदायक लगे, लेकिन बाहर निकलते ही प्रदूषण, अव्यवस्थित ट्रैफिक, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और सफाई की समस्याएं सामने आ जाती हैं। कई लोगों ने यह भी तर्क दिया कि विदेशों में साफ हवा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, मजबूत कानून व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक सेवाएं जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती हैं।

 

संदीप मॉल का जवाब
आलोचनाओं के जवाब में संदीप मॉल ने कहा कि जिन लोगों के पास पर्याप्त संसाधन होते हैं, वे शुद्ध पानी, बेहतर भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी कई समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकते हैं।  हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि वे स्वयं विदेश जाने पर विचार करते, तो सबसे बड़ी वजह सामाजिक भरोसे की कमी और बढ़ता नैतिक भ्रष्टाचार होती।

 

'भारत का अपनापन दुनिया में अलग'
बहस के दौरान कई लोगों ने भारत के पक्ष में भी मजबूत तर्क दिए। कुछ यूजर्स का कहना था कि यदि किसी व्यक्ति की वार्षिक डिस्पोजेबल आय 20 से 25 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो भारत दुनिया के सबसे अच्छे देशों में से एक हो सकता है, जहां अपेक्षाकृत कम लागत में घरेलू सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाजनक जीवनशैली उपलब्ध है। एक लेखक ने भी अपनी राय साझा करते हुए कहा कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, दुबई, सिंगापुर और बैंकॉक जैसे देशों में समय बिताया है। उनके अनुसार, इन देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर भले बेहतर हो, लेकिन भारत का सामाजिक जुड़ाव, पारिवारिक संस्कृति और अपनापन अलग पहचान रखते हैं।

 

बहस का असली सवाल
यह चर्चा केवल भारत और विदेश की तुलना तक सीमित नहीं है। असल सवाल यह है कि बेहतर जीवन की परिभाषा क्या है? क्या आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ-सुथरा वातावरण और सार्वजनिक सुविधाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, या परिवार, संस्कृति, सामाजिक रिश्ते और अपनेपन का एहसास? सोशल मीडिया पर इस सवाल के अलग-अलग जवाब देखने को मिल रहे हैं। कुछ लोगों के लिए जीवन की गुणवत्ता का मतलब बेहतर व्यवस्था है, जबकि दूसरों के लिए अपनी मिट्टी, अपने लोग और सांस्कृतिक जुड़ाव सबसे बड़ी संपत्ति हैं।

   

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!