Edited By Anu Malhotra,Updated: 30 Jun, 2026 03:52 PM

हाल ही में सामने आई एक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि ब्लड ग्रुप का संबंध टाइप 2 डायबिटीज के खतरे से हो सकता है। खासकर जिन लोगों का ब्लड ग्रुप B होता है, उनमें अन्य ब्लड ग्रुप्स की तुलना में डायबिटीज का रिस्क थोड़ा ज्यादा पाया गया है।
Type-2 Diabetes: हाल ही में सामने आई एक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि ब्लड ग्रुप का संबंध टाइप 2 डायबिटीज के खतरे से हो सकता है। खासकर जिन लोगों का ब्लड ग्रुप B होता है, उनमें अन्य ब्लड ग्रुप्स की तुलना में डायबिटीज का रिस्क थोड़ा ज्यादा पाया गया है।
2024 में की गई एक बड़े स्तर की स्टडी, जिसे umbrella review कहा जाता है, में कई पुरानी रिसर्च का विश्लेषण किया गया। इसमें लगभग 51 अलग-अलग सिस्टमेटिक रिव्यू और करीब 270 तरह के स्वास्थ्य संबंधों को जांचा गया। यह स्टडी करीब 6,870 लोगों से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़ों के आधार पर निकाला गया। शोधकर्ताओं ने इन सभी डेटा को दोबारा जांचते हुए यह समझने की कोशिश की कि कौन सा संबंध वास्तव में मजबूत है और कौन सा सिर्फ अनुमान पर आधारित है।
नतीजों में पाया गया कि अधिकतर दावों के पीछे मजबूत सबूत नहीं थे। लेकिन एक बात अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखी-ब्लड ग्रुप B वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना लगभग 28 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकती है, तुलना में उन लोगों के जिनका ब्लड ग्रुप B नहीं है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया कि यह बढ़ा हुआ खतरा बहुत बड़ा नहीं है। जीवनशैली जैसे गलत खानपान, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता डायबिटीज के जोखिम को इससे कहीं ज्यादा प्रभावित करते हैं।
क्या B ब्लड ग्रुप वालों को चिंता करनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस अध्ययन को देखकर डरने की जरूरत नहीं है। डायबिटीज किसी एक कारण से होने वाली बीमारी नहीं है। इसके पीछे कई बड़े जोखिम कारक जिम्मेदार होते हैं। जैसे कि...
-मोटापा
-शारीरिक गतिविधियों की कमी
-असंतुलित खानपान
-लगातार तनाव
-परिवार में डायबिटीज का इतिहास
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड ग्रुप को केवल एक अतिरिक्त जोखिम संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि बीमारी का मुख्य कारण माना जाना चाहिए।
मानव शरीर में ब्लड ग्रुप A, B, AB और O इस आधार पर तय होते हैं कि लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर कौन से एंटीजन मौजूद हैं। इसके अलावा Rh फैक्टर यह बताता है कि ब्लड पॉजिटिव है या नेगेटिव।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लड ग्रुप और बीमारियों के बीच संबंध को लेकर पहले भी कई दावे किए गए हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर मजबूत सबूतों पर खरे नहीं उतरते। इस अध्ययन में भी यही सामने आया कि सिर्फ एक ही संबंध-ब्लड ग्रुप B और टाइप 2 डायबिटीज-ऐसा है जिसे अपेक्षाकृत मजबूत माना जा सकता है।
Healthy Lifestyle ही सबसे बड़ा बचाव
शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लड ग्रुप को बदला नहीं जा सकता, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल में सुधार जरूर किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति रोजाना एक्सरसाइज करे, संतुलित आहार ले, वजन कंट्रोल रखे और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराए, तो Type-2 Diabetes के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के संबंधों को पूरी तरह समझने के लिए अभी और गहरी रिसर्च की जरूरत है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर ब्लड ग्रुप शरीर की मेटाबॉलिक हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न शोध अध्ययनों और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता और सामान्य जानकारी प्रदान करना है, न कि किसी प्रकार की चिकित्सीय सलाह देना।