Edited By Anu Malhotra,Updated: 19 Feb, 2026 08:54 AM

दुनिया की महाशक्तियों के बीच अपनी रणनीतिक धाक जमाते हुए भारत ने परमाणु हथियारों के मामले में एक नया मुकाम हासिल किया है। शीत युद्ध के दौर के बाद जहां दुनिया के बड़े देश अपने परमाणु भंडार को कम कर रहे हैं, वहीं एशिया के इस दिग्गज ने अपनी सुरक्षा...
नेशनल डेस्क: दुनिया की महाशक्तियों के बीच अपनी रणनीतिक धाक जमाते हुए भारत ने परमाणु हथियारों के मामले में एक नया मुकाम हासिल किया है। शीत युद्ध के दौर के बाद जहां दुनिया के बड़े देश अपने परमाणु भंडार को कम कर रहे हैं, वहीं एशिया के इस दिग्गज ने अपनी सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए अपने तरकश में घातक तीर बढ़ा लिए हैं।
Federation of American Scientists की ताज़ा रिपोर्ट 'Status of World Nuclear Forces' के मुताबिक, भारत अब दुनिया की टाॅप 9 परमाणु शक्तियों की सूची में छठे पायदान पर काबिज हो गया है। वैश्विक स्तर पर मौजूद कुल 12,321 परमाणु वॉरहेड्स में से भारत के पास अब 180 हथियार मौजूद हैं। गौर करने वाली बात यह है कि बीते महज 5 सालों के भीतर भारत ने अपने परमाणु भंडार में लगभग 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो देश की बढ़ती सैन्य ताकत और सुरक्षा तैयारियों का परिचायक है।
रूस और अमेरिका आज भी इस दौड़ में सबसे आगे
वैश्विक परिदृश्य पर नज़र डालें तो रूस और अमेरिका आज भी इस दौड़ में सबसे आगे हैं, जिनके पास दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का करीब 86 प्रतिशत हिस्सा है। सूची में रूस पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जबकि चीन, फ्रांस और ब्रिटेन क्रमशः तीसरे, चौथे और 5वें नंबर पर मौजूद हैं। भारत ने इस मामले में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान (7वें स्थान) के साथ-साथ इजरायल और उत्तर कोरिया को भी पीछे छोड़ दिया है।
दुनिया के टॉप 9 परमाणु हथियार संपन्न देश (2026)
| रैंक |
देश |
परमाणु हथियारों की संख्या (अनुमानित) |
| 1 |
रूस (Russia) |
5,459 |
| 2 |
अमेरिका (USA) |
5,177 |
| 3 |
चीन (China) |
600 |
| 4 |
फ्रांस (France) |
290 |
| 5 |
ब्रिटेन (UK) |
225 |
| 6 |
भारत (India) |
180 |
| 7 |
पाकिस्तान (Pakistan) |
170 |
| 8 |
इजरायल (Israel) |
90 |
| 9 |
उत्तर कोरिया (North Korea) |
50 |
रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि 1986 के शीत युद्ध के चरम दौर के मुकाबले आज दुनिया में परमाणु हथियारों की कुल संख्या में भारी कमी आई है, लेकिन हाल के वर्षों में यह गिरावट सुस्त पड़ी है। विशेष रूप से एशियाई देशों में परमाणु हथियारों के विस्तार की होड़ बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह वृद्धि भले ही बड़ी महाशक्तियों के मुकाबले सीमित हो, लेकिन यह अत्यंत स्थिर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की यह 'परमाणु छलांग' रक्षा गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।