Edited By Mansa Devi,Updated: 07 Feb, 2026 06:06 PM

सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि सदियों से साम्राज्यों की ताकत, अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ और वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम आधार रहा है। प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आज के आधुनिक सेंट्रल बैंकों तक, सोने की अहमियत कभी कम नहीं हुई।
नेशनल डेस्क: सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि सदियों से साम्राज्यों की ताकत, अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ और वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम आधार रहा है। प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आज के आधुनिक सेंट्रल बैंकों तक, सोने की अहमियत कभी कम नहीं हुई। यही वजह है कि जैसे ही सोने के दाम चढ़ते या गिरते हैं, बाजार के साथ-साथ आम लोगों की धड़कनें भी तेज या धीमी हो जाती हैं।
वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सोना, चांदी और कॉपर जैसे मेटल जिन देशों के पास प्रचुर मात्रा में होते हैं, वही भविष्य की आर्थिक महाशक्ति बनते हैं। ऐसे में यह सवाल बेहद अहम हो जाता है कि आखिर दुनिया में सबसे ज्यादा सोना कौन सा देश पैदा करता है।
दुनिया में सबसे ज्यादा सोना कौन बनाता है?
इस सवाल का सीधा और साफ जवाब है चीन। चीन पिछले 10 सालों से लगातार दुनिया का नंबर-1 गोल्ड प्रोड्यूसर बना हुआ है। सोना उत्पादन के मामले में उसने ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे बड़े देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
चीन के नंबर-1 बनने के 3 बड़े कारण
1. सोने की भरपूर खदानें
चीन के शेडोंग, हेनान और अन्य क्षेत्रों में सोने की बड़ी-बड़ी खदानें मौजूद हैं, जहां बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
2. हाई-टेक माइनिंग तकनीक
चीन ने अत्याधुनिक मशीनों और तकनीक में भारी निवेश किया है। इसकी वजह से वह उन इलाकों से भी सोना निकाल पा रहा है, जहां माइनिंग बेहद मुश्किल और महंगी मानी जाती है।
3. ‘अपना सोना, अपने पास’ नीति
चीन जितना सोना निकालता है, उसका बड़ा हिस्सा वह एक्सपोर्ट नहीं करता। इस सोने का इस्तेमाल घरेलू ज्वेलरी इंडस्ट्री और सरकारी गोल्ड रिजर्व को मजबूत करने में किया जाता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होती है।
खपत में भारत-चीन की कांटे की टक्कर
हालांकि उत्पादन में चीन सबसे आगे है, लेकिन सोने की खपत यानी खरीद के मामले में भारत और चीन के बीच हमेशा कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है। जहां चीन खुद बड़े पैमाने पर सोना निकालता है, वहीं भारत अपनी जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है।
भारत में कितना सोना निकलता है?
भारत अपनी कुल जरूरत का 1% से भी कम सोना खुद पैदा करता है। देश में हर साल करीब 1.6 टन सोना ही निकाला जाता है, जो मुख्य रूप से कर्नाटक की हुट्टी गोल्ड माइंस से आता है। इसके उलट, भारतीय उपभोक्ता हर साल करीब 800 से 900 टन सोना खरीद लेते हैं।
हम कहां से मंगवाते हैं?
क्योंकि हमारे पास अपनी खदानें बहुत कम हैं, इसलिए भारत अपनी मांग पूरी करने के लिए स्विट्जरलैंड, यूएई (दुबई) और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से भारी मात्रा में सोना इम्पोर्ट (आयात) करता है। यही कारण है कि जब भी डॉलर महंगा होता है या विदेश में सोने के दाम बढ़ते हैं, तो भारत में कीमतें तुरंत आसमान छूने लगती हैं।
भारतीय घरों में छिपा है ‘असली खजाना’
भले ही भारत सोना कम पैदा करता हो, लेकिन घरेलू सोने के भंडार में भारत दुनिया में सबसे आगे है। अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास 25,000 से 28,000 टन सोना गहनों और सिक्कों के रूप में मौजूद है। यह मात्रा कई बड़े देशों के सरकारी गोल्ड रिजर्व से भी कहीं ज्यादा है। सरकार अब नई खदानों की नीलामी और माइनिंग सेक्टर को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रही है, ताकि भविष्य में भारत भी उत्पादन बढ़ा सके, लेकिन इसमें अभी समय लगेगा।
भारत के मुकाबले चीन में सोना काफी सस्ता
अगर हम आज (7 फरवरी 2026) के भाव की तुलना करें, तो चीन में 10 ग्राम सोने की कीमत भारत के मुकाबले लगभग 16,000 रुपये से लेकर 17500 रुपये तक कम है। दरअसल भारत सरकार सोने पर भारी इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty) लगाती है। इसके अलावा ग्राहक को 3% GST भी देना पड़ता है। इन टैक्सों की वजह से भारत में सोने की कीमत बेस प्राइस से बहुत ऊपर चली जाती है। जबकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोना उत्पादक है, इसलिए उसे बाहर से सोना मंगाने पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वहां घरेलू बाजार में टैक्स का बोझ भारत जितना नहीं है।