Flipkart को भारी पड़ा खराब टैबलेट बेचना: उपभोक्ता अदालत ने लगाया जुर्माना

Edited By Updated: 29 Mar, 2026 09:30 AM

flipkart faces fine for selling defective tablets consumer court imposes fine

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट (Flipkart) को सेवा में कमी और अपनी ही पॉलिसी का उल्लंघन करना भारी पड़ गया है। दिल्ली के 'डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल फोरम-III (वेस्ट)' ने कंपनी को फटकार लगाते हुए पीड़ित ग्राहक को रिफंड और मुआवजा...

नेशनल डेस्क। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट (Flipkart) को सेवा में कमी और अपनी ही पॉलिसी का उल्लंघन करना भारी पड़ गया है। दिल्ली के 'डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल फोरम-III (वेस्ट)' ने कंपनी को फटकार लगाते हुए पीड़ित ग्राहक को रिफंड और मुआवजा देने का कड़ा आदेश सुनाया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद साल 2020 का है। विकासपुरी (दिल्ली) के रहने वाले राजीव महाय ने सितंबर 2020 में फ्लिपकार्ट से 10,999 रुपये में एक 'Lenovo Tab M10' खरीदा था। 27 सितंबर को जब टैबलेट की डिलीवरी हुई तो पता चला कि उसका डिस्प्ले खराब है और काम नहीं कर रहा है। शिकायतकर्ता ने उसी दिन फ्लिपकार्ट को इसकी जानकारी दी। कंपनी का टेक्नीशियन घर आया और उसने भी डिवाइस के खराब होने की पुष्टि की। इसके बावजूद फ्लिपकार्ट ने अपनी '30 दिन की रिप्लेसमेंट गारंटी' का पालन नहीं किया और न ही खराब सामान वापस (Reverse Pick-up) उठाया।

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फ्लिपकार्ट का बचाव और कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान फ्लिपकार्ट ने खुद को केवल एक 'इंटरमीडियरी' (बिचौलिया) बताते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की। कंपनी का तर्क था कि टैबलेट एक थर्ड-पार्टी सेलर ने बेचा है। डिवाइस में खराबी ग्राहक की गलती (फिजिकल डैमेज) की वजह से आई है। हालांकि अध्यक्ष सोनिका मेहरोत्रा की अध्यक्षता वाले फोरम ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि फ्लिपकार्ट ने अपनी ही नीतियों का उल्लंघन किया है। हैरानी की बात यह है कि सुनवाई के दौरान कंपनी ने 15,000 रुपये के सेटलमेंट का ऑफर भी दिया था जिसे ग्राहक ने ठुकरा दिया।

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उपभोक्ता अदालत का फैसला

12 मार्च को सुनाए गए फैसले में आयोग ने फ्लिपकार्ट को 'सेवा में घोर कमी' का दोषी पाया और निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. रिफंड: ग्राहक को टैबलेट की पूरी कीमत 10,999 रुपये वापस की जाए।

  2. मुआवजा: मानसिक परेशानी के बदले 5,000 रुपये का जुर्माना।

  3. कानूनी खर्च: मुकदमेबाजी के लिए 4,000 रुपये अलग से देने होंगे।

अदालत ने फ्लिपकार्ट को 30 दिनों के भीतर इन सभी निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया है।

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