Edited By Radhika,Updated: 18 Jun, 2026 01:27 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस शहर में G7 शिखर सम्मेलन 2026 में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। भारत अभी G7 का Permanent Member नहीं है लेकिन आठवीं बार उसे इस सम्मेलन में निमंत्रित किया गया है। अब यह चर्चा हो रही है कि क्या...
G7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस शहर में G7 शिखर सम्मेलन 2026 में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। भारत अभी G7 का Permanent Member नहीं है लेकिन आठवीं बार उसे इस सम्मेलन में निमंत्रित किया गया है। अब यह चर्चा हो रही है कि क्या भारत को G7 की सहस्यता मिल सकती है। आइए जानते हैं कि क्या है G7-
क्या है G7 ?
G7दुनिया के सात सबसे विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था (Advanced Economy) वाले देशों - कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक आर्थिक मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और सहयोग करना है।
ये भी पढ़ें- कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता सरकार को नहीं मिली राहत, ऋतब्रत बनर्जी बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष
G7 में शामिल देशों को क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
क्या आप जानते हैं कि G7 समिट में शामिल होने वाले देशों को कई फायदे मिलते है। वहीं अगर भारत भी इस लिस्ट में शामिल होता है तो उसे ये फायदे मिलेंगे-
1. दुनिया के बड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने का मौका-
ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे बड़े मुद्दों पर G7 जरूरी भूमिका निभाता है. जो देश जी7 का सदस्य बनता है उसे इन विषयों पर अपनी प्राथमिकताओं (Priorities) को सीधे रखने का मौका मिलता है।
2. नई टेक्नोलॉजी और डिजिटल नियम बनाने में बड़ी भूमिका-
आज डेटा सुरक्षा, AI, 5G, 6G और डिजिटल टैक्स जैसे क्षेत्रों में नियम और स्टैंडर्ड काफी जरूरी हो चुके हैं. G7 देश अक्सर इन क्षेत्रों के लिए शुरुआती ढांचा तैयार करते हैं। ऐसे में सदस्य देश अपने हितों के अनुसार वैश्विक नियमों को प्रभावित कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें- कच्चा तेल सस्ता होने पर भी तुरंत क्यों नहीं घटते Petrol और diesel के दाम? केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने समझाया कैलकुलेशन
3. दुनिया के बड़े मंचों पर कूटनीतिक रिश्ते बनते हैं मजबूत-
सदस्य देशों को संयुक्त राष्ट्र, नाटो और विश्व बैंक जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने रणनीतिक हितों और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक साझा मंच मिलता है।
4. ग्लोबल बिजनेस और सप्लाई चेन का भरोसेमंद पार्टनर बन सकते हैं-
कोविड महामारी के बाद सप्लाई चेन दुनिया की बड़ी चिंता बन गई। चिप्स, दवाइयां, एनर्जी और कच्चे माल की उपलब्धता अब रणनीतिक महत्व का विषय बन चुकी है। G7 देश भरोसेमंद साझेदारों का नेटवर्क मजबूत करना चाहते हैं। सदस्य बनने पर किसी देश को इस नेटवर्क का जरूरी हिस्सा बनने का मौका मिल सकता है।
अगर भारत की G7 में एंट्री हुई तो क्या असर पड़ेगा?
अगर भारत को G7 की सदस्यता मिलती है, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, वैश्विक पहचान और अंतरराष्ट्रीय फैसलों में भागीदारी पर पड़ सकता है। AI, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन साथ ही व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर भारत सीधे अपनी बात रख सकेगा। रणनीतिक रूप से, सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट और नाटो पावर मिलने से भारत अपने खिलाफ होने वाली किसी भी अंतरराष्ट्रीय या सीमा पार आतंकवाद से जुड़े प्रतिकूल प्रस्तावों को तुरंत ब्लॉक कर सकेगा। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने में बड़ी मदद मिलेगी। भारत को विदेशी निवेश मे मदद मिलेगी, आधुनिक तकनीकों को सौंपना आसान होगा और भारतीय व्यापार के लिए नए वैश्विक रास्ते खुलेंगे।
G7 समिट में पहुंचे पीएम मोदी
हाल ही में पीएम मोदी इस समिट का हिस्सा बनने के लिए फ्रांस पहुंचे हैं। यहां पर उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मुलाकात की। ऐसा कहा जा रहा है कि G7 समिट में रूस-युक्रेन संघर्ष, ईरान-अमेरिका तनाव और मिडिल ईस्ट की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की जा सकती है।