पहले 2 नंबर से चूके, फिर YouTube से की तैयारी, बिना कोचिंग क्रैक डाला JEE Advanced, अब ISRO में बनें वैज्ञानिक

Edited By Updated: 21 Jun, 2026 12:32 AM

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कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और खुद पर विश्वास हो, तो असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन जाती है। मेरठ के मोदीपुरम के रहने वाले संकेत कुमार ने इसे सच कर दिखाया है। देवान पब्लिक स्कूल के पूर्व छात्र संकेत का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में...

नेशनल डेस्क: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और खुद पर विश्वास हो, तो असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन जाती है। मेरठ के मोदीपुरम के रहने वाले संकेत कुमार ने इसे सच कर दिखाया है। देवान पब्लिक स्कूल के पूर्व छात्र संकेत का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक/अभियंता के पद पर हुआ है।

हार नहीं मानी: 2 नंबर की कमी को बनाया ताकत
संकेत की यह कामयाबी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। साल 2021 में वह मात्र 2 नंबरों से JEE एडवांस्ड क्वालीफाई करने से चूक गए थे। उस समय कई लोगों ने उन्हें ड्रॉप (एक साल का अंतराल) न लेने की सलाह दी, लेकिन संकेत ने हार नहीं मानी और खुद पर भरोसा जताया।

बिना कोचिंग, यूट्यूब से की पढ़ाई
आज के दौर में जहां छात्र कोचिंग संस्थानों पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, वहीं संकेत ने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ-स्टडी और यूट्यूब लेक्चर के माध्यम से अपनी तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत रंग लाई और अगले ही साल उन्होंने JEE मेन और एडवांस्ड दोनों क्लियर कर भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) तिरुवनंतपुरम में एरोस्पेस इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।

हटके चुनी राह: बैच के अकेले छात्र बने
IIST में पढ़ाई के दौरान संकेत ने अपनी अलग पहचान बनाई। जहां अन्य छात्र प्रोपल्शन और एरोडायनामिक्स जैसे विषय चुन रहे थे, संकेत ने 'वाइब्रेशन और एकॉस्टिक्स' को चुना। वह अपने बैच के इकलौते छात्र थे जिन्होंने इस विषय को अपनाया। उन्होंने जापान की कंपनी 'शिनरा इंक' के साथ एक उन्नत इंजीनियरिंग रिसर्च प्रोजेक्ट पर भी काम किया। 8.2 CGPA के साथ पास होने के बाद उन्हें इसरो के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और उनका चयन हो गया।

माता-पिता को दिया 'सरप्राइज'
संकेत की सफलता की कहानी में एक दिलचस्प मोड़ यह भी है कि उन्होंने इसरो के इंटरव्यू में जाने की जानकारी अपने माता-पिता को भी नहीं दी थी। वह चाहते थे कि चयन होने के बाद ही उन्हें यह खुशखबरी देकर चौंका दें।

परिवार का मिला पूरा साथ
संकेत अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं। उन्होंने बताया कि जब लोग ड्रॉप लेने पर सवाल उठा रहे थे, तब उनके परिवार ने उनका साथ दिया और उनके भाई हर्षित कुमार ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखा। उनकी मां सुनीता सिंह और पिता गुलशन कुमार अपने बेटे की उपलब्धि पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।

गुरुओं को भी गर्व
देवान पब्लिक स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल असीम दुबे ने संकेत को एक अनुशासित और गंभीर छात्र बताया, जो हमेशा अपने करियर और लक्ष्यों को लेकर केंद्रित रहता था।

संकेत की पहली नियुक्ति महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में होगी, जहाँ लॉन्च से पहले रॉकेट प्रणालियों का अंतिम परीक्षण किया जाता है। मेरठ के इस होनहार ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और परिवार के सहयोग से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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