Edited By Pardeep,Updated: 06 Jun, 2026 10:07 PM

भारत इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) के दौर से गुजर रहा है। दशकों से हमारी अर्थव्यवस्था कच्चे तेल के आयात और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भर रही है, लेकिन अब भविष्य की तस्वीर बदलने वाली है।
नेशनल डेस्कः भारत इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) के दौर से गुजर रहा है। दशकों से हमारी अर्थव्यवस्था कच्चे तेल के आयात और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भर रही है, लेकिन अब भविष्य की तस्वीर बदलने वाली है। जलवायु लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं के बीच भारत एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है, जहां रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन का बोलबाला होगा।
2070 तक 'नेट जीरो' का लक्ष्य
भारत ने साल 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए देश के एनर्जी इकोसिस्टम को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालता है। इसीलिए अब सरकार घरेलू ईंधन विकल्पों और साफ-सुथरी ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
2030 से 2035: बड़े बदलाव की शुरुआत
उम्मीद जताई जा रही है कि 2030 से 2035 के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। देश सोलर और विंड पावर की क्षमता बढ़ाने में तेजी से प्रगति कर रहा है और बिजली उत्पादन के लिए गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। इसी दौरान डीजल वाहनों को धीरे-धीरे हटाने और पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की मात्रा बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
2050 तक सड़कों पर दिखेगा अलग नजारा
विशेषज्ञों के अनुसार, 2050 तक भारत के यातायात का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। सड़कों पर टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का दबदबा होगा। वहीं, भारी कमर्शियल वाहनों और लॉजिस्टिक क्षेत्र में सीएनजी (CNG) और एलएनजी (LNG) जैसी नेचुरल गैसों की भूमिका अहम होगी। भविष्य में कच्चे तेल का उपयोग गाड़ियों के ईंधन के बजाय पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री में प्लास्टिक और केमिकल बनाने के लिए अधिक किया जा सकता है।
ग्रीन एनर्जी सुपर पावर बनेगा भारत
2070 से 2076 के बीच भारत एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में होगा जो पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल हो। इस दौरान ग्रीन हाइड्रोजन स्टील उत्पादन, शिपिंग और एविएशन जैसे बड़े उद्योगों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत बनेगा। साथ ही, न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) का भी काफी विस्तार होने की संभावना है।
क्या खत्म हो जाएगा पेट्रोल-डीजल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाली पीढ़ी पेट्रोल-डीजल देख पाएगी? स्रोतों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल पूरी तरह से खत्म तो नहीं होंगे, लेकिन आने वाले कुछ दशकों में आम सड़कों पर इनकी मौजूदगी में भारी कमी आएगी। भविष्य में ये ईंधन केवल कुछ विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित रह सकते हैं।