Edited By Rahul Rana,Updated: 09 Aug, 2026 06:12 PM

NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए भारी विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के कुछ सप्ताह बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।
संबलपुर: NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए भारी विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के कुछ सप्ताह बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर में शनिवार को एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की नई पीढ़ी की उम्मीदों और संकल्प के सामने मंत्री पद की उनकी जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ भी नहीं है। अपने संसदीय क्षेत्र संबलपुर में दिए भाषण में प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की नई पीढ़ी के संकल्प और उनकी सोच की वास्तविकता समझाने की कोशिश की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने सीधे Gen Z से संवाद किया।
‘नई पीढ़ी के संकल्प के सामने मेरी जिम्मेदारी कुछ भी नहीं’
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में ओडिशा की महान विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उस धरती से आते हैं, जहां भीमभोई, उत्कलमणि गोपबंधु दास और गंगाधर मेहर जैसी महान हस्तियों ने जन्म लिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के लोगों के संकल्प के सामने उनकी जिम्मेदारी कुछ भी नहीं है। प्रधान ने कहा, “देश के हित से बढ़कर कुछ भी नहीं है।”
उन्होंने नई पीढ़ी की भूमिका पर फोकस करते हुए कहा कि युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, देश की युवा पीढ़ी भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।
‘Gen Z हमारी है, उसे गुमराह करने की कोशिश हुई’
पूर्व शिक्षा मंत्री ने Gen Z को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी के करीब 20 करोड़ लोगों के कंधों पर भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। आगे उन्होंने कहा, “Gen Z हमारी है... कुछ लोगों ने Gen Z को गुमराह करने की कोशिश की।” उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
युवाओं के संघर्ष और बलिदान का किया जिक्र
अपने भाषण में धर्मेंद्र प्रधान ने वीर सुरेंद्र साईं समेत ओडिशा के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि युवाओं ने हमेशा बदलाव की अगुवाई की है और देश के लिए बलिदान दिया है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर शिक्षा व्यवस्था तथा केंद्र सरकार पर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए गए थे। इसी राजनीतिक दबाव और विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।