Global Risks Report: 2036 तक दुनिया के सामने खड़े होंगे ये 10 बड़े खतरे, जानें कौन से देश हैं तैयार

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 09:50 AM

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Global Risks Report: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 के आधार पर भविष्य का खाका काफी चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दशक (2036 तक) में दुनिया को आर्थिक अस्थिरता, बेकाबू तकनीक और पर्यावरणीय विनाश जैसे...

Global Risks Report: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 के आधार पर भविष्य का खाका काफी चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दशक (2036 तक) में दुनिया को आर्थिक अस्थिरता, बेकाबू तकनीक और पर्यावरणीय विनाश जैसे ट्रिपल-खतरे का सामना करना होगा।

2036 तक के 10 सबसे बड़े वैश्विक जोखिम

जैसे-जैसे हम अगले दशक की ओर बढ़ रहे हैं, खतरों की प्रकृति तात्कालिक (आर्थिक/राजनैतिक) से बदलकर अस्तित्वगत (पर्यावरण/AI) हो जाएगी।

1. चरम मौसमी घटनाएं: बाढ़, सूखा और लू जैसी घटनाएं नंबर 1 खतरा बनी रहेंगी।

2. पारिस्थितिकी तंत्र का पतन: जैव विविधता का नुकसान और जंगलों/समुद्रों का विनाश।

3.पृथ्वी प्रणाली में अपरिवर्तनीय बदलाव: ग्लोबल वार्मिंग के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ना।

4. भ्रामक सूचनाएं (Misinformation): AI द्वारा जनित गलत खबरें समाज को गुमराह करेंगी।

5. AI के नकारात्मक परिणाम: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अनियंत्रित होना या गलत हाथों में जाना।

6 प्राकृतिक संसाधनों की कमी: पानी, भोजन और स्वच्छ हवा का संकट।

7. सामाजिक असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई का और गहरा होना।

8. साइबर असुरक्षा: डेटा चोरी और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर डिजिटल हमले।

9. सामाजिक ध्रुवीकरण: समुदायों और देशों के बीच बढ़ता अविश्वास।

10. प्रदूषण: हवा, पानी और मिट्टी में जहर का घुलना।

समय सीमा के अनुसार जोखिमों का विश्लेषण

अगले 2 साल (अल्पकालिक)

फिलहाल दुनिया भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक खींचतान से जूझ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अभी सबसे बड़ा डर देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष (War) और आर्थिक मंदी का है। समाज में बढ़ता बंटवारा और मानवाधिकारों का हनन भी तात्कालिक चिंताएं हैं।

अगले 10 साल (दीर्घकालिक)

2036 तक आते-आते आर्थिक मुद्दे पीछे छूट जाएंगे और पर्यावरण सबसे बड़ा मुद्दा बन जाएगा। चौंकाने वाली बात यह है कि AI का खतरा जो पहले 30वें स्थान पर था, वह लंबी अवधि में सीधा 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

कौन से देश हैं तैयार?

रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि इन खतरों से कोई भी देश पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, लेकिन तैयारी के स्तर अलग-अलग हैं:

यूरोपीय देश और नॉर्डिक राष्ट्र (जैसे नॉर्वे, स्वीडन): ये देश पर्यावरणीय बदलावों और टिकाऊ ऊर्जा (Sustainable Energy) के मामले में सबसे आगे हैं। उनके पास 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर' के लिए बेहतर बजट है।

तकनीकी महाशक्तियां (जैसे अमेरिका, चीन, भारत): ये देश AI और साइबर सुरक्षा के लिए कड़े नियम बना रहे हैं। हालांकि, गलत सूचनाओं (Deepfakes) से निपटने में ये भी संघर्ष कर रहे हैं।

विकासशील राष्ट्र: भारत जैसे देश आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारी जनसंख्या के कारण संसाधनों की कमी (पानी/भोजन) इनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

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