Edited By Rohini Oberoi,Updated: 06 Feb, 2026 12:41 PM

गर्भावस्था के दौरान सेहत का ख्याल रखना जितना जरूरी है उतनी ही बड़ी चुनौती आजकल बढ़ता हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) बनता जा रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक जिला महिला अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम में आने वाली करीब 20% गर्भवती महिलाएं हाई बीपी की समस्या...
Hypertension in Pregnancy Symptoms : गर्भावस्था के दौरान सेहत का ख्याल रखना जितना जरूरी है उतनी ही बड़ी चुनौती आजकल बढ़ता हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) बनता जा रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक जिला महिला अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम में आने वाली करीब 20% गर्भवती महिलाएं हाई बीपी की समस्या से जूझ रही हैं। यह स्थिति न केवल मां के लिए बल्कि गर्भस्थ शिशु के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। स्त्री रोग एवं बांझपन विशेषज्ञ डॉ. सुप्रिया अंजनी मिश्रा के अनुसार गर्भावस्था में हाई बीपी को नजरअंदाज करना अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और समय से पहले डिलीवरी (Pre-term Delivery) का कारण बन सकता है।
क्या है प्री-एक्लेम्पसिया?
हाइपरटेंशन जब गंभीर रूप ले लेता है तो उसे प्री-एक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia) कहा जाता है। इससे महिला के गुर्दे (Kidneys) और यकृत (Liver) को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उच्च रक्तचाप के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता जिससे उसका विकास रुक सकता है।

इन लक्षणों को कभी न करें इग्नोर
डॉ. सुप्रिया के अनुसार अगर गर्भावस्था के दौरान शरीर ये संकेत दे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

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तेज सिरदर्द: लगातार सिर में भारीपन या दर्द रहना।
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आंखों की समस्या: धुंधला दिखाई देना या आंखों के सामने चमकती रोशनी महसूस होना।
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सूजन: चेहरे, हाथों या पैरों में अचानक और ज्यादा सूजन आना।
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सांस लेने में तकलीफ: लेटने या चलने पर सांस फूलना और बेचैनी होना।
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पेट में दर्द: पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द महसूस होना।
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अन्य संकेत: दिल की धड़कन तेज होना, जल्दी थकान लगना या नाक से खून आना।

बचाव के रामबाण उपाय: डॉक्टर की सलाह
हाइपरटेंशन से बचने और स्वस्थ डिलीवरी के लिए इन बातों का पालन करें:
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नियमित चेकअप: समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाएं ताकि किसी भी बदलाव का तुरंत पता चल सके।
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डाइट में बदलाव: भोजन में नमक कम कर दें। हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, जूस और साबुत अनाज को शामिल करें।
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हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, गुनगुना पानी पीना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
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पर्याप्त नींद: शरीर को रिकवर करने के लिए कम से कम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद बेहद जरूरी है।
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हल्का व्यायाम: डॉक्टर की सलाह लेकर रोजाना करीब 20 मिनट की हल्की वॉक या योग करें।