Edited By Anu Malhotra,Updated: 08 Oct, 2026 02:01 PM

तमिलनाडु के कोयंबटूर और करूर स्थित सरकारी अस्पतालों में दवा की पैकेजिंग को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले दवा के लिफाफों पर तमिल और अंग्रेज़ी के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी दवा लेने के निर्देश छपे हुए...
कोयंबटूर: तमिलनाडु के कोयंबटूर और करूर स्थित सरकारी अस्पतालों में दवा की पैकेजिंग को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले दवा के लिफाफों पर तमिल और अंग्रेज़ी के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी दवा लेने के निर्देश छपे हुए थे। सोशल मीडिया पर इन पैकेटों की तस्वीरें वायरल होने के बाद उठे भारी विरोध को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने त्रिभाषीय निर्देश वाले इन पैकेटों का वितरण तुरंत प्रभाव से रोक दिया है।
अस्पतालों में हिंदी थोपने की कोशिश
DMK नेता टी.आर.बी. राजा ने करूर के सरकारी अस्पताल के दवा पैकेट की तस्वीर साझा करते हुए केंद्र सरकार और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पैकेटों के जरिए केंद्र की 'तीन-भाषा नीति' को तमिलनाडु के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है। राजा ने अपनी पोस्ट में कहा, "ऐसा लगता है कि तमिलनाडु के अस्पतालों में भी तीन-भाषा नीति थोपी जा रही है। पहले करूर और अब कोयंबटूर में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।"
अस्पताल प्रशासन की सफाई: 18 महीने पुराने स्टॉक की हो रही थी सप्लाई
विवाद बढ़ता देख अस्पताल अधिकारियों ने स्पष्टीकरण जारी किया है। प्रशासन के अनुसार, ये पैकेट किसी नई खरीद प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं। ये लिफाफे 'चिंतामणि कोऑपरेटिव सोसाइटी' द्वारा पिछले 18 महीनों से सप्लाई किए जा रहे थे और पूर्ववर्ती सरकार के दौरान भी इन्हीं पैकेटों का इस्तेमाल होता था।
अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि मामला संज्ञान में आते ही इन त्रिभाषीय लिफाफों का इस्तेमाल तुरंत बंद करने के सख्त आदेश जारी कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु आधिकारिक तौर पर 'दो-भाषा नीति' (तमिल और अंग्रेज़ी) का पालन करता है और केंद्र की तीन-भाषा नीति का हमेशा कड़ा विरोध करता रहा है।
राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए मगरमच्छ के आंसू बहा रही DMK
इस पूरे मामले पर TVK (तमिलगा वेट्री कज़गम) नेता अरुणराज की त्वरित प्रतिक्रिया आई, जिन्होंने इस मुद्दे पर DMK को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। अरुणराज ने आरोप लगाया कि DMK अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए भाषा के मुद्दे पर मगरमच्छ के आँसू बहा रही है।
अरुणराज ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में दवा के कवर आमतौर पर सेंट्रल जेल से खरीदे जाते हैं, जिन पर निर्देश सिर्फ तमिल में छपे होते हैं। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि पिछली DMK सरकार के समय जेल से सप्लाई में कमी आई थी। जिसके कारण 31 दिसंबर 2025 को 'इरोड डिस्ट्रिक्ट प्रिंटिंग इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी' को 4 लाख इमरजेंसी कवर का ऑर्डर दिया गया था। ये त्रिभाषीय कवर जनवरी 2026 में खुद DMK के कार्यकाल के दौरान ही जनता को बांटे गए थे। उन्होंने आगे दावा किया कि कोयंबटूर में इस तरह की तीन-भाषा वाली पैकेजिंग को DMK सरकार के दौरान ही पहले हरी झंडी दी जा चुकी थी।