ICICI के बाद HDFC बैंक ने भी बढ़ाई मिनिमम बैलेंस की लिमिट, सेविंग अकाउंट में अब इतना पैसा रखना होगा जरूरी

Edited By Updated: 13 Aug, 2025 06:49 PM

hdfc bank minimum balance increase

आईसीआईसीआई बैंक के बाद अब एचडीएफसी बैंक ने भी अपने सेविंग अकाउंट के लिए न्यूनतम औसत बैलेंस की लिमिट बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। यह बदलाव निजी बैंकों द्वारा हाल ही में लागू की गई नई नीतियों के अनुरूप है।

नेशनल डेस्क: आईसीआईसीआई बैंक के बाद अब एचडीएफसी बैंक ने भी अपने सेविंग अकाउंट के लिए न्यूनतम औसत बैलेंस की लिमिट बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। यह बदलाव निजी बैंकों द्वारा हाल ही में लागू की गई नई नीतियों के अनुरूप है। एचडीएफसी बैंक के इस नए नियम के अनुसार, मेट्रो और शहरी शाखाओं में नया खाता खोलने वाले ग्राहकों को अब हर महीने कम से कम ₹25,000 का औसत बैलेंस बनाए रखना होगा, जो कि पहले ₹10,000 था। यह नई सीमा 1 अगस्त 2025 से प्रभावी होगी।

नए नियमों का असर
एचडीएफसी बैंक के इस कदम से न्यूनतम बैलेंस की लिमिट लगभग ढाई गुना बढ़ गई है। इस नियम का असर केवल उन ग्राहकों पर होगा जो 1 अगस्त 2025 या उसके बाद नया खाता खोलेंगे। मौजूदा ग्राहकों पर फिलहाल यह नियम लागू नहीं होगा, जब तक बैंक कोई नई सूचना जारी न करे।

यदि कोई ग्राहक नया खाता खोलने के बाद हर महीने ₹25,000 का औसत बैलेंस बनाए रखने में असफल रहता है, तो बैंक उनसे पेनल्टी वसूल सकता है। मेट्रो और शहरी शाखाओं में पेनल्टी शॉर्टफॉल की राशि का 6% या ₹600 (जो भी कम हो) होगा।

ICICI बैंक ने लिमिट बढ़ाकर किया ₹50,000
इसी कड़ी में, प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंक आईसीआईसीआई ने भी सेविंग अकाउंट के न्यूनतम बैलेंस में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत, 1 अगस्त 2025 से नए सेविंग अकाउंट खोलने वाले ग्राहकों को अब ₹50,000 का न्यूनतम औसत बैलेंस रखना अनिवार्य होगा।

पहले ICICI बैंक में न्यूनतम बैलेंस ₹10,000 था, जिसे अब पांच गुना बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया गया है। यह नियम केवल नए अकाउंट खोलने वाले ग्राहकों पर लागू होगा।

ग्राहकों के लिए जरूरी जानकारी
इन बदलावों के कारण अब ग्राहकों को अपने खाते में अधिक राशि बनाए रखनी होगी। यदि वे तय न्यूनतम बैलेंस नहीं रख पाते हैं, तो उन्हें बैंक द्वारा तय पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नए अकाउंट खोलने वाले ग्राहकों को इस बात का खास ध्यान रखना होगा।

यह कदम निजी बैंकों की बढ़ती सेवा लागत और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार को देखते हुए उठाया गया है। बैंक द्वारा ग्राहकों को समय-समय पर ऐसी नीतिगत बदलावों की जानकारी देना अनिवार्य होता है ताकि वे अपनी वित्तीय योजना बेहतर तरीके से बना सकें।

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