Edited By Pardeep,Updated: 12 May, 2026 12:23 PM

नेशनल डेस्कः असम में विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की बड़ी जीत के बाद Himanta Biswa Sarma ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। Himanta Biswa Sarma ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया...
नेशनल डेस्कः असम में विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की बड़ी जीत के बाद Himanta Biswa Sarma ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। Himanta Biswa Sarma ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया। BJP के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद राज्य में तीसरी बार लगातार NDA सरकार का गठन हुआ है।
राजभवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने हिमंत बिस्वा सरमा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत BJP के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
चार मंत्रियों ने भी ली शपथ
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ चार अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें BJP के वरिष्ठ नेता Rameswar Teli और Ajanta Neog शामिल हैं। इसके अलावा AGP प्रमुख Atul Bora और BPF विधायक Chandan Brahma ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
असम की राजनीति में बना नया रिकॉर्ड
हिमंत बिस्वा सरमा 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, जब उन्होंने Sarbananda Sonowal की जगह पद संभाला था। अब लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने असम में पहले गैर-कांग्रेसी नेता के रूप में यह उपलब्धि हासिल की है।
उनकी अगुवाई में BJP ने इस चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। 126 सदस्यीय विधानसभा में BJP ने 82 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी दल AGP और BPF को 10-10 सीटें मिलीं। इस तरह NDA गठबंधन ने कुल 102 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को बड़ा झटका दिया।
पूर्वोत्तर में BJP का बढ़ता प्रभाव
हिमंत बिस्वा सरमा को पूर्वोत्तर में BJP का सबसे मजबूत चेहरा माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने न केवल असम बल्कि पूरे नॉर्थ-ईस्ट में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी रणनीति और संगठन क्षमता की वजह से BJP लगातार क्षेत्र में अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बड़ी जीत के बाद सरमा की राष्ट्रीय राजनीति में भी भूमिका और मजबूत हो सकती है।