Holika Dahan 2026: होलिका दहन के दिन कर लें ये काम, जीवन में आएगी खुशहाली!

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 06:56 PM

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फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला होलिका दहन हिंदू परंपरा का एक प्रमुख पर्व है। यह उत्सव असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

नेशनल डेस्क: फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला होलिका दहन हिंदू परंपरा का एक प्रमुख पर्व है। यह उत्सव असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है, जो प्रेम, सौहार्द और उल्लास का संदेश देता है।

साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च (मंगलवार) को पड़ रही है। इसी दिन होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों वाली होली 4 मार्च (बुधवार) को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की रात को विशेष साधना और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पौराणिक कथा: प्रह्लाद की अटूट भक्ति और नरसिंह अवतार

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, असुर राजा Hiranyakashipu स्वयं को ईश्वर मानता था और अपने पुत्र Prahlada की विष्णु भक्ति से क्रोधित रहता था। उसने अपनी बहन Holika को आदेश दिया कि वह अग्नि में बैठकर प्रह्लाद को जला दे।

कथा के अनुसार, होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई। इसके बाद भगवान Narasimha ने अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है, जो भक्ति और सत्य की शक्ति को दर्शाता है।

होलिका दहन 2026: क्यों मानी जाती है खास रात?

मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, जप और उपाय विशेष फलदायी होते हैं। इसे कई लोग ‘सिद्धि की रात’ भी कहते हैं, जब सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है। हालांकि सभी धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और आस्था पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें विवेक और विश्वास के साथ करना चाहिए।

होलिका दहन पर किए जाने वाले पारंपरिक उपाय

  • मेवा और मिठाई अर्पित करें: होलिका की अग्नि में सूखे मेवे और मिठाई चढ़ाने से घर की नकारात्मकता दूर होने की मान्यता है।
  • जटा वाला नारियल अर्पित करें: कच्चा नारियल अग्नि में अर्पित कर सात परिक्रमा करने से कार्यों में आ रही बाधाएं कम हो सकती हैं।
  • पान, सुपारी और नारियल का समर्पण: इन वस्तुओं को अग्नि में अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • काले तिल और सरसों का प्रयोग: सूखा नारियल, काले तिल और सरसों को सिर से उतारकर अग्नि में डालना नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
  • दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्यदायी समझा जाता है।
  • होलिका की राख का प्रयोग: राख में हल्दी मिलाकर घर में रखने से सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।

होलिका दहन हमें सिखाता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है, जबकि सच्ची भक्ति और सत्य की हमेशा जीत होती है। यह पर्व समाज में सकारात्मकता, क्षमा और प्रेम का भाव जगाने का अवसर देता है।

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