बड़ी कंपनियों ने खींचे हाथ तो कॉलेजों ने बदला गेम: 2026 बैच के लिए नौकरियों की बारिश, जानें क्या है नई स्ट्रैटेजी

Edited By Updated: 05 Apr, 2026 11:12 AM

despite slowdown in it sector engineering colleges are seeing surge in placemen

New Delhi: जहां एक तरफ बड़े IT और ITeS सेक्टर में एंट्री-लेवल भर्तियों को लेकर सुस्ती की खबरें आ रही हैं, वहीं देश के छोटे शहरों (टियर 2 और 3) के इंजीनियरिंग कॉलेजों से राहत भरी खबर सामने आई है। साल 2026 बैच के लिए चल रहा प्लेसमेंट सीजन उम्मीद से...

New Delhi: जहां एक तरफ बड़े IT और ITeS सेक्टर में एंट्री-लेवल भर्तियों को लेकर सुस्ती की खबरें आ रही हैं, वहीं देश के छोटे शहरों (टियर 2 और 3) के इंजीनियरिंग कॉलेजों से राहत भरी खबर सामने आई है। साल 2026 बैच के लिए चल रहा प्लेसमेंट सीजन उम्मीद से कहीं बेहतर साबित हो रहा है। कई कंपनियों ने 2026 बैच के लिए नौकरियों की बारिश की है। वहीं कई संस्थानों ने पिछले साल के मुकाबले न सिर्फ ज्यादा प्लेसमेंट दिए हैं, बल्कि सैलरी पैकेज में भी उछाल दर्ज किया है।

क्यों सफल रही इन कॉलेजों की रणनीति?
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन कॉलेजों ने केवल बड़ी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रणनीति बदली, उन्हें इसका सीधा फायदा मिला है। इन संस्थानों ने निम्नलिखित 3 मुख्य बातों पर जोर दिया:- 
- AI और अपस्किलिंग: छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक डोमेन में ट्रेनिंग दी गई।
- इंटर्नशिप और PPO: कंपनियों के साथ मिलकर इंटर्नशिप और प्री-प्लेसमेंट ऑफर्स (PPO) पर दोगुना ध्यान दिया।
- रिक्रूटर्स का दायरा बढ़ाया: पारंपरिक IT कंपनियों के अलावा स्टार्टअप्स, कंसल्टिंग और एनालिटिक्स कंपनियों को कैंपस बुलाया।

प्रमुख संस्थानों के प्लेसमेंट आंकड़े और सफलता की कहानी
संस्थान का नाम                                   प्लेसमेंट की स्थिति                                                  खास बात
एमिटी यूनिवर्सिटी                                   60% छात्र प्लेस                                 औसत सैलरी 8.5 लाख से बढ़कर 9 लाख हुई।
दयानंद सागर (बेंगलुरु)                          70% छात्र प्लेस                            400+ कंपनियां आईं, जिनमें 15-20% नए स्टार्टअप्स थे।
पूर्णिमा ग्रुप (जयपुर)                               85% छात्र प्लेस                              उच्चतम पैकेज 32 लाख से बढ़कर 53 लाख रुपये पहुंचा।
MAIT (दिल्ली)                                पिछले साल से बेहतर                           एनालिटिक्स और कंसल्टिंग रोल्स पर विशेष फोकस रहा।


एक्सपर्ट्स की राय: मास हायरिंग घटी, पर टैलेंट की मांग बरकरार
- एमिटी यूनिवर्सिटी के डॉ. अंजनी कुमार भटनागर ने बताया कि उन्होंने मंदी का अंदाजा पहले ही लगा लिया था, इसलिए उन्होंने BFSI (बैंकिंग), कोर इंजीनियरिंग और इंटरनेशनल मौकों की तरफ रुख किया।

- दयानंद सागर संस्थान के एमएन गुरुवेंकटेश के मुताबिक, बड़ी कंपनियों ने भले ही व्यक्तिगत तौर पर कम भर्तियां की हों, लेकिन कॉलेजों ने रिक्रूटर्स की संख्या बढ़ाकर इस कमी को पूरा कर दिया। उन्होंने कैंपस में एक विशेष AI लैब भी स्थापित की है।

- प्लक्षा यूनिवर्सिटी की श्राबनी घोष का कहना है कि वॉल्यूम (ज्यादा संख्या में) हायरिंग करने वाली कंपनियों ने भले ही हाथ पीछे खींचे हों, लेकिन स्पेशलाइज्ड टेक्नोलॉजी और हाई-इम्पैक्ट रोल्स के लिए डिमांड अब भी बहुत मजबूत है।

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