Edited By Mehak,Updated: 24 Feb, 2026 03:15 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 75 साल की उम्र के बावजूद दिनभर एक्टिव और फिट रहते हैं। उनकी दिनचर्या में हल्का और पौष्टिक नाश्ता, मोरिंगा पराठा, हल्की गुजराती खिचड़ी और संतुलित आहार शामिल है। वह नियमित रूप से योग, प्राणायाम और ध्यान करते हैं। प्रकृति...
नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिटनेस हमेशा से चर्चा का विषय रही है। 75 साल की उम्र होने के बावजूद वह देश और विदेश की यात्रा करते हैं, देश की प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते हैं, उद्घाटन समारोहों में शामिल होते हैं और बच्चों, युवाओं से बातचीत करते हैं। इतना एक्टिव रहने का राज केवल राजनीति में व्यस्त रहना ही नहीं, बल्कि उनके संतुलित आहार और हेल्दी लाइफस्टाइल में भी छुपा है।
सुबह की शुरुआत हल्के और पौष्टिक नाश्ते से
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम मोदी सुबह 9 बजे से पहले ही नाश्ता कर लेते हैं। उनका नाश्ता हल्का और सुपाच्य होता है, ताकि पूरे दिन ऊर्जा बनी रहे। इसमें मौसमी फल, उबली या हल्की पकी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल होते हैं। तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना वह सुबह के समय नहीं खाते।
मोरिंगा पराठा – स्वास्थ्य का खास हिस्सा
प्रधानमंत्री मोदी की थाली में अक्सर मोरिंगा (सहजन) से बना पराठा मौजूद रहता है। मोरिंगा में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते हैं। यह हड्डियों को मजबूत बनाने, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। पीएम मोदी के लिए यह साधारण लेकिन पोषण से भरपूर भोजन उनकी दिनचर्या की खास पहचान है।
रात का भोजन: हल्की गुजराती खिचड़ी
गुजरात से संबंध रखने वाले पीएम मोदी को हल्की और कम मसाले वाली गुजराती खिचड़ी बहुत पसंद है। रात का भोजन हल्का होता है ताकि पाचन तंत्र स्वस्थ रहे और नींद अच्छी आए। यह शरीर को आराम देता है और दिनभर की थकान मिटाने में मदद करता है।
योग और प्राणायाम – फिटनेस का मूल मंत्र
पीएम मोदी नियमित रूप से योग और प्राणायाम करते हैं। उनकी दिनचर्या में शामिल हैं:
- सूर्य नमस्कार
- ध्यान
- योग निद्रा
योग से न केवल शरीर लचीला रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। यही वजह है कि 75 साल की उम्र में भी वह शारीरिक और मानसिक रूप से फिट बने रहते हैं।
प्रकृति से जुड़ाव – मानसिक सुकून
प्रधानमंत्री को प्रकृति के करीब रहना बहुत पसंद है। समय मिलने पर वे घास पर नंगे पांव चलते हैं। इससे तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है। प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना उनके जीवन का अहम हिस्सा है और यही उनकी सक्रियता और स्वस्थ जीवन का राज है।