Edited By Mansa Devi,Updated: 13 Feb, 2026 12:25 PM

किसानों के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक देशभर के किसानों को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।
नेशनल डेस्क: किसानों के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक देशभर के किसानों को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। यह धनराशि 21 किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी गई है। लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने बताया कि करोड़ों किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। सरकार का कहना है कि किसानों की आय को सहारा देने और खेती की बढ़ती लागत से राहत दिलाने के उद्देश्य से यह योजना लगातार जारी है।
2019 में हुई थी शुरुआत
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फरवरी 2019 में इस योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों को सीधी आर्थिक सहायता देना है, ताकि वे बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों के लिए समय पर निवेश कर सकें।
हर साल 6,000 रुपये की सहायता
योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते हैं। यह रकम एक बार में नहीं, बल्कि तीन समान किस्तों में दी जाती है। हर चार महीने में 2,000 रुपये सीधे किसान के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं। इससे किसानों को पूरे साल खेती से जुड़े खर्चों में मदद मिलती है।
सीधे खाते में पहुंचती है रकम
इस योजना की खास बात यह है कि सभी भुगतान प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए किए जाते हैं। राशि सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। आधार सीडिंग और ई-केवाईसी प्रक्रिया के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही मिले।
निगरानी और पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने योजना के संचालन के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाया है। अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। सरकार का दावा है कि तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार की संभावना काफी कम हुई है और पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नकद सहायता योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मददगार साबित होती हैं। खेती की लागत बढ़ने के समय यह सहायता किसानों के लिए राहत का काम करती है और कर्ज के बोझ को कुछ हद तक कम करने में सहायक हो सकती है। सरकार का कहना है कि भविष्य में भी यह योजना जारी रहेगी और पात्र किसानों तक इसका लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, समय-समय पर पात्रता की जांच कर योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।