PM केयर फंड में भारी बढ़ोतरी: खजाने में पहुंचे ₹8,452 करोड़, लेकिन खर्च हुए केवल ₹87.85 लाख; उठ रहे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

Edited By Updated: 19 Aug, 2026 05:22 AM

huge increase in pm cares fund

कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2020 में शुरू किए गए 'PM CARES फंड' को लेकर एक बार फिर विवाद और बहस छिड़ गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की हालिया ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक इस फंड का कुल खजाना (कॉर्पस) बढ़कर...

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2020 में शुरू किए गए 'PM CARES फंड' को लेकर एक बार फिर विवाद और बहस छिड़ गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की हालिया ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक इस फंड का कुल खजाना (कॉर्पस) बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि आपदाओं और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के मुख्य उद्देश्य वाले इस फंड से इस पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान केवल 87.85 लाख रुपये ही खर्च किए गए।

93% राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा, ब्याज से हुई बंपर कमाई
ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि कुल खजाने का लगभग 93% हिस्सा यानी 7,846.65 करोड़ रुपये बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में सुरक्षित रखा गया है। वहीं, बाकी बची राशि अनुसूचित बैंकों में कैश और बचत खातों में जमा है। दिलचस्प बात यह है कि इस साल फंड को बैंकों से जितना ब्याज मिला, वह नए मिले दानों के लगभग बराबर है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में फंड को घरेलू स्रोतों से 479.04 करोड़ रुपये और विदेशी स्रोतों से 92.83 लाख रुपये का दान मिला (कुल लगभग ₹480 करोड़)। दूसरी तरफ, बैंकों में जमा राशि से फंड को 475 करोड़ रुपये (FD पर ₹469.37 करोड़ और बचत खातों पर ₹5.77 करोड़) केवल ब्याज के रूप में मिले।

आखिर कहां खर्च हुआ पैसा?
रिपोर्ट के अनुसार, कुल खर्च किए गए 87.85 लाख रुपये में से 87.84 लाख रुपये 'PM CARES for Children Scheme' (बच्चों के लिए योजना) में गए हैं। इसके अलावा, एकमात्र अन्य खर्च के रूप में महज 451 रुपये बैंक और एसएमएस (SMS) शुल्क के रूप में दर्ज किए गए हैं। वर्ष की समाप्ति पर फंड के पास कुल ₹8,452.06 करोड़ का क्लोजिंग बैलेंस बचा।


324 करोड़ रुपए के रिफंड पर गहराया सस्पेंस
ऑडिट रिपोर्ट में 'इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों' (कार्यान्वयन एजेंसियों) जैसे DRDO और NHAI से 324.66 करोड़ रुपये की वापसी (रिफंड) दर्ज की गई है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष में वापस मिली ₹84.31 करोड़ की राशि से लगभग चार गुना अधिक है। लेकिन इस एक पन्ने के ऑडिट स्टेटमेंट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस एजेंसी ने यह पैसा क्यों लौटाया और इसे मूल रूप से किस काम के लिए जारी किया गया था।

पारदर्शिता और ऑडिट में देरी पर उठे सवाल
फंड के इस ऑडिट स्टेटमेंट के सामने आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और वित्तीय विशेषज्ञों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है।

  • अंजलि भारद्वाज (पारदर्शिता कार्यकर्ता): उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि आपदाओं में नागरिकों की मदद के लिए बने इस फंड को पूरी तरह से गोपनीयता के दायरे में रखा गया है। उन्होंने इतनी बड़ी राशि के निष्क्रिय पड़े रहने और ऑडिट रिपोर्ट के साथ संलग्न विस्तृत नोट्स (Notes 1 to 16) को वेबसाइट पर सार्वजनिक न करने पर सवाल उठाए हैं।
  • अतुल मोदानी (चार्टर्ड अकाउंटेंट): उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह ऑडिट रिपोर्ट वित्तीय वर्ष खत्म होने के लगभग 16 महीने बाद (अगस्त 2026 के पहले हफ्ते में) साइन की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वेबसाइट पर अपलोड की गई रिपोर्ट में यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) नहीं है, जो एक बड़ी चूक हो सकती है।
  • सीए रुचिरा वाघानी: उन्होंने भी फंड में भारी मात्रा में आ रहे पैसे और उसके नाममात्र के खर्च के बीच के भारी अंतर पर आपत्ति जताई है।

राजनीतिक घमासान और कानूनी स्थिति
इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने फंड की जांच कराने की मांग की है। इससे पहले, तमिलनाडु के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भी आरोप लगाया था कि कोविड-19 के दौरान इस फंड में लगभग ₹30,000 करोड़ जुटाए गए थे, लेकिन इसके इस्तेमाल में कोई पारदर्शिता नहीं है।

बता दें कि केंद्र सरकार हमेशा से यह कहती रही है कि PM CARES फंड एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो पूरी तरह स्वैच्छिक योगदान से चलता है और इसमें कोई सरकारी बजट शामिल नहीं है। यही कारण है कि इसे आरटीआई (RTI) कानून के दायरे से बाहर और सीएजी (CAG) ऑडिट से मुक्त रखा गया है। अगस्त 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फंड के पैसे को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

लेकिन महामारी के पांच साल बाद भी, आपातकालीन राहत के लिए जमा की गई इतनी बड़ी राशि का केवल बैंकों में पड़े रहना और ब्याज बटोरना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!