Impact of the West Asian crisis: लंबे समय तक महंगा रह सकता है कच्चा तेल, भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव

Edited By Updated: 10 May, 2026 02:21 PM

impact of the west asian crisis crude oil prices may remain high for a long tim

पश्चिम एशिया संकट के लंबा खिंचने की आशंका के चलते कच्चे तेल के दाम अभी ऊंचे स्तर पर बने रहेंगे। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने यह बात कही है। पार्क ने साक्षात्कार में कहा, ''कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की आशंका के...

नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया संकट के लंबा खिंचने की आशंका के चलते कच्चे तेल के दाम अभी ऊंचे स्तर पर बने रहेंगे। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने यह बात कही है। पार्क ने साक्षात्कार में कहा, ''कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की आशंका के बीच हमारा अनुमान है कि नए परिदृश्य में यह 2026 में औसतन 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहेगा। 2027 में यह 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहेगा। इसलिए हमारा मानना ​​है कि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।'' उन्होंने कहा कि वायदा कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं।

वित्त वर्ष में महंगाई भी काफी बढ़ जाएगी
हालांकि, उन्होंने कहा, ''हमने हमेशा हाजिर बाजार की कीमतों और निकट के वायदा बाजार में एक तरह का प्रीमियम भी देखा है क्योंकि अभी कच्चे तेल की बहुत कमी है।'' पश्चिम एशिया संकट का भारत पर क्या असर होगा, इस बारे में पार्क ने कहा कि इससे देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 0.6 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे यह 6.3 प्रतिशत रह जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा इससे मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई भी काफी बढ़ जाएगी।

2026-27 में वृद्धि दर में 0.6 प्रतिशत की कमी आएगी
एडीबी ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि मजबूत घरेलू मांग की वजह से चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत के स्तर पर मजबूत बनी रहेगी। अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो जाएगी। महंगाई के मामले में, एडीबी ने मौजूदा वित्त वर्ष में इसके 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया था। भारत के लिए, पार्क ने कहा, ''हमें लगता है कि 2026-27 में वृद्धि दर में 0.6 प्रतिशत की कमी आएगी। यह हमारे आदर्श परिदृश्य पर आधारित हे। लेकिन इससे अगले साल वृद्धि पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। भारत अगले साल वापसी करेगा।

भारत में जो कुछ भी होता है, उसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है
उन्होंने कहा कि इस साल महंगाई 2.4 प्रतिशत बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो जाएगी। उन्होंने कहा, ''तो यह इस क्षेत्र (एशिया-प्रशांत) पर पड़ने वाले महंगाई के असर से थोड़ा ज्यादा है, क्योंकि भारत आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर है। अगर आप चीन को हटा दें, तो इस साल वृद्धि पर यह नकारात्मक 0.6 प्रतिशत का असर पूरे क्षेत्र के लिए भी काफी हद तक एक जैसा है।  एडीबी ने 29 अप्रैल को अपनी विशेष अद्यतन रिपोर्ट में 2026 के लिए एशिया प्रशांत के लिए वृद्धि दर के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। खाद्य उत्पादन पर एल नीनो के असर के बारे में पूछे जाने पर पार्क ने कहा, ''बेशक, यह बहुत अनिश्चित है। जाहिर है जब भी भारत में फसल खराब होती है, तो हमें एक समस्या होती है, ज्यादा कीमतों के साथ। चावल के वैश्विक व्यापार में भारत का एक बड़ा हिस्सा है। इसलिए भारत में जो कुछ भी होता है, उसका अक्सर दूसरे देशों पर भी बड़ा असर पड़ता है।

उर्वरक की कीमत बढ़ने से किसान कम खाद का इस्तेमाल करेंगे
उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती उर्वरक कीमतों के अलावा यह भी चिंता का एक कारण है। उन्होंने कहा कि उर्वरक की कीमत बढ़ने से किसान कम खाद का इस्तेमाल करेंगे, जिससे पैदावार भी कम होगी और साल के आखिर में इसकी उपलब्धता भी कम होगी। उन्होंने कहा कि इसका असर खाने की चीजों की कीमतों पर जरूर पड़ेगा, लेकिन यह कितना गहरा होगा इसका अनुमान गैस संकट के आधार पर ही लगाया जा सकेगा। 

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