Edited By Rahul Singh,Updated: 19 Sep, 2026 02:08 PM

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने एक नया जियोस्टेशनरी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, EOS-05 लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट केंद्र सरकार को उपमहाद्वीप पर लगातार नजर रखने की क्षमता देगा और पाकिस्तान के साथ संकट की स्थिति को बदल सकता है।
नई दिल्ली : एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने एक नया जियोस्टेशनरी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, EOS-05 लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट केंद्र सरकार को उपमहाद्वीप पर लगातार नजर रखने की क्षमता देगा और पाकिस्तान के साथ संकट की स्थिति को बदल सकता है। 'डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के अनुसार, यह सैटेलाइट भारत को उपमहाद्वीप में सैन्य गतिविधियों खासकर संकट के समय पाकिस्तान के नौसैनिक युद्धपोतों, विमानों, रणनीतिक संपत्तियों की आवाजाही और सेना की तैनाती – पर लगातार नजर रखने में सक्षम बनाता है।
4 सितंबर को GSLV-F17 रॉकेट ने EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया, जिससे लगभग 34,900 किमी से 35,900 किमी की ऊंचाई से लगातार निगरानी संभव हो गई है। ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि यह सैटेलाइट भारत का पहला "जियो ऑर्बिट से काम करने वाला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट होगा जो देश के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा प्रदान करेगा।" रिपोर्ट में कहा गया है, "इस सैटेलाइट का लॉन्च भारत की इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR) क्षमताओं को मजबूत करने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।" भारत की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने 2024 में निगरानी के लिए लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) और जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में 52 रक्षा सैटेलाइट तैनात करने के लिए 'स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज-III' (SBS-III) कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। ISRO का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट के तहत 21 सैटेलाइट तैनात करना है, जबकि निजी क्षेत्र 31 सैटेलाइट विकसित करेगा।
मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संकट के बाद भारतीय रणनीतिक समुदाय ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर चिंता जताई थी। इंडियन डिफेंस स्पेस सिम्पोजियम (IDS) 2026 में भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा, "अगर हम अंतरिक्ष में विफल रहते हैं, तो हमें अंधेरे में (बिना जानकारी के) लड़ना पड़ेगा। हालांकि, अगर हम अंतरिक्ष में दबदबा बनाए रखते हैं, तो हम दूरदर्शिता के साथ लड़ेंगे।" फिलहाल, भारत के सैटेलाइट मुख्य रूप से LEO में हैं, जहां वे हाई-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें तो देते हैं, लेकिन पृथ्वी की सतह पर तेजी से घूमने के कारण उनकी कुछ सीमाएं होती हैं। इसके विपरीत, जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में मौजूद EOS-05 उपमहाद्वीप पर लगातार नजर रखने में मदद करेगा। पब्लिकेशन ने कहा, “इस क्षमता से भारत की सटीक हमला करने की ताकत (प्रिसिजन-स्ट्राइक क्षमता) और मज़बूत होगी, क्योंकि सटीक हमला करने वाली मिसाइलें न केवल रेंज और सटीकता पर निर्भर करती हैं, बल्कि उन्हें टारगेट की लोकेशन के बारे में समय पर जानकारी की भी जरूरत होती है। इसलिए, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर की व्यापक 'सेंसर-टू-शूटर' चेन में, स्पेस-बेस्ड सर्विलांस (अंतरिक्ष से निगरानी) एक अहम भूमिका निभाएगा।”
चूंकि मोबाइल सिस्टम काफी हद तक छिपे रहने पर निर्भर करते हैं, इसलिए लगातार बड़े इलाके की निगरानी और साथ ही हाई-रिज़ॉल्यूशन वाली फॉलो-अप निगरानी से टारगेट का पता लगाने और उस पर हमला करने के बीच का समय कम हो जाता है। इसमें कहा गया, “अंतरिक्ष में एक अतिरिक्त नजर होने से भारत के पास मौजूद लंबी दूरी की सटीक हमला करने वाली मिसाइलों का जखीरा और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।”