मिडिल ईस्ट में जंग के बीच भारत के लिए ‘गुड न्यूज’! रूस ने किया ये बड़ा ऐलान

Edited By Updated: 04 Mar, 2026 06:30 PM

amid the middle east war russia makes a significant announcement

मध्य पूर्व में तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बेचैनी बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का अहम रास्ता माना जाता है।

नेशनल डेस्क : मध्य पूर्व में तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बेचैनी बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का अहम रास्ता माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक कीमतों और आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मार्ग से सप्लाई बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है, जिसका असर भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों पर साफ दिखाई देगा।

रूस का संकेत: जरूरत पड़ी तो बढ़ेगी आपूर्ति

इसी बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह भारत और चीन को अतिरिक्त तेल आपूर्ति देने के लिए तैयार है। इंटरफैक्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री Alexander Novak ने कहा है कि मौजूदा हालात में एशियाई बाजारों को स्थिर रखने के लिए रूस उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

भारत में रूसी तेल की हिस्सेदारी

डेटा एजेंसी केप्लर के अनुसार, फरवरी में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। इस दौरान रूस से आयात एक मिलियन बैरल प्रतिदिन (mbd) से थोड़ा अधिक रहा, हालांकि यह जनवरी की तुलना में हल्का कम था। वहीं, सऊदी अरब ने अपनी आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की और महीने-दर-महीने लगभग 30% वृद्धि के साथ एक मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक निर्यात किया। इससे संकेत मिलता है कि भारत अपने सोर्स को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।

रणनीतिक जलमार्ग पर बढ़ता तनाव

ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस अहम समुद्री रास्ते पर नियंत्रण का दावा किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। किसी भी सैन्य या सुरक्षा जोखिम से यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बयान दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार है, ताकि समुद्री मार्ग खुला रहे।

भारत पर संभावित असर

भारत का प्रतिदिन लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर आता है, जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आयात किया जाता है। अगर इस कॉरिडोर में लंबी अवधि तक तनाव बना रहता है, तो भारतीय रिफाइनरियों को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की ओर से अतिरिक्त सप्लाई का आश्वासन भारत के लिए एक ‘बफर’ की तरह काम कर सकता है, जिससे अचानक मूल्यवृद्धि या आपूर्ति संकट का जोखिम कम हो सकता है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!