Edited By Anu Malhotra,Updated: 06 May, 2026 07:54 AM

PM Gati Shakti National Master Plan: रेल यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही है। बता दें कि ₹23,437 करोड़ की लागत से 3 रेल परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई जिससे देश के 6 राज्य के 19 जिलों को फायदा मिलेगा।
PM Gati Shakti National Master Plan: रेल यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही है। बता दें कि ₹23,437 करोड़ की लागत से 3 रेल परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई जिससे देश के 6 राज्य के 19 जिलों को फायदा मिलेगा।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने रेलवे से जुड़ी 3 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 23,437 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के तहत नागदा-मथुरा, गुंतकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रेल खंडों पर तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इन रेल लाइनों के विस्तार से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी और लंबे समय से व्यस्त चल रहे रूट पर भीड़भाड़ में कमी आएगी। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि ये सभी सेक्शन पहले से ही अत्यधिक व्यस्त हैं, इसलिए अतिरिक्त लाइनें बनना बेहद जरूरी था।
ये परियोजनाएं सरकार की महत्वाकांक्षी योजना PM Gati Shakti National Master Plan के तहत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य देश में बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक सिस्टम को मजबूत करना है।
इन 6 राज्यों को मिलेगा फायदा
इन प्रोजेक्ट्स से मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुल 19 जिलों को फायदा मिलेगा। करीब 901 किलोमीटर तक रेलवे नेटवर्क का विस्तार होगा और लगभग 4,161 गांवों की 83 लाख से अधिक आबादी को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी।
इन नई रेल लाइनों से धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। इसमें Mahakaleshwar Temple, Ranthambore National Park, Keoladeo National Park, Mathura, Vrindavan और Naimisharanya जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं।
माल ढुलाई के लिहाज से भी ये परियोजनाएं काफी अहम हैं। इन मार्गों पर कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, इस्पात, लौह अयस्क और उर्वरक जैसी चीजों की ढुलाई होती है। नई लाइनों के बनने से हर साल लगभग 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
सरकार ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय लाभ भी बताए हैं। इसके जरिए तेल आयात में करीब 37 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में 185 करोड़ किलोग्राम तक की गिरावट होगी। यह प्रभाव लगभग 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है।