JPMorgan ने भारतीय बाजार की घटाई रेटिंग, 20,500 तक गिर सकता है Nifty, निवेशकों की बढ़ी चिंता

Edited By Updated: 24 Apr, 2026 11:43 AM

jpmorgan issues alert on indian stock market downgrades rating to  neutral

भारतीय शेयर बाजार को लेकर विदेशी ब्रोकरेज हाउस का नजरिया कमजोर होता दिख रहा है। HSBC के बाद अब JPMorgan ने भी भारतीय इक्विटी पर अपना रुख नरम कर लिया है। JPMorgan ने भारतीय बाजार को ‘ओवरवेट’ से घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया है। निफ्टी 50 के सभी टारगेट कम...

JPMorgan downgrades Indian stocks: भारतीय शेयर बाजार को लेकर विदेशी ब्रोकरेज हाउस का नजरिया कमजोर होता दिख रहा है। HSBC के बाद अब JPMorgan ने भी भारतीय इक्विटी पर अपना रुख नरम कर लिया है। JPMorgan ने भारतीय बाजार को ‘ओवरवेट’ से घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया है। निफ्टी 50 के सभी टारगेट कम कर दिए हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। 

निफ्टी के टारगेट में बड़ी कटौती

ब्रोकरेज ने अपने सभी अनुमानों में कटौती की है। बुल केस में निफ्टी का लक्ष्य 33,000 से घटाकर 30,000 कर दिया गया है। वहीं बेस केस टारगेट 30,000 से घटाकर 27,000 और बेयर केस 24,000 से घटाकर 20,500 कर दिया गया है। यह बदलाव बाजार के प्रति सतर्क रुख का संकेत माना जा रहा है।

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क्यों बदला नजरिया?

JPMorgan ने डाउनग्रेड के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं:

ऊंचा वैल्यूएशन: भारतीय बाजार लंबे समय से अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, जिससे गिरावट का जोखिम बढ़ा है।
कमाई पर दबाव: कंपनियों की आय वृद्धि उम्मीद से कमजोर रह सकती है, जिससे शेयर कीमतों पर असर पड़ सकता है।
सप्लाई और डाइल्यूशन: IPO और अन्य फंड जुटाने की गतिविधियों से बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ सकती है।
टेक सेक्टर में सीमित एक्सपोजर: भारत में हाई-ग्रोथ टेक, AI और एडवांस टेक्नोलॉजी कंपनियों की हिस्सेदारी अभी कम है।

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ताइवान और टेक सेक्टर पर बढ़ा फोकस

JPMorgan ने भारत में निवेश घटाकर ताइवान और टेक सेक्टर को प्राथमिकता दी है। ब्रोकरेज ने TAIEX इंडेक्स के टारगेट भी बढ़ाए हैं, जिससे एशियाई निवेश का झुकाव बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

HSBC ने भी घटाई रेटिंग

इससे पहले HSBC ने भी भारत की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरवेट’ कर दी थी। ब्रोकरेज के अनुसार मिडिल ईस्ट तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत के लिए चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जिससे आयात बिल, रुपए और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

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