झारखंड में सूखे की आहट: जून में 60% कम बारिश से थमी धान की बुवाई, संकट में अन्नदाता

Edited By Updated: 24 Jun, 2026 02:59 PM

jharkhand clouds of crisis loom over kharif crops due to scanty rainfall

झारखंड में कई जिलों के किसान इस वर्ष खरीफ फसल को लेकर चिंतित हैं क्योंकि जून में कम बारिश होने के कारण वे अब तक धान की बुवाई की तैयारी शुरू नहीं कर पाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक की स्थिति के अनुसार राज्य में 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई...

नेशनल डेस्क। झारखंड में कई जिलों के किसान इस वर्ष खरीफ फसल को लेकर चिंतित हैं क्योंकि जून में कम बारिश होने के कारण वे अब तक धान की बुवाई की तैयारी शुरू नहीं कर पाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक की स्थिति के अनुसार राज्य में 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है और अगर स्थिति नहीं सुधरी तो यह आंकड़ा बढ़ सकता है। 

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए झारखंड सरकार ने पहले ही पूरे राज्य के लिए आकस्मिक सहायता योजना तैयार की हुई है। उन्होंने कहा, कई जिलों में किसानों ने धान की बुवाई की तैयारी शुरू तक नहीं की है। जिन किसानों ने धान की पौध के लिए नर्सरी तैयार की थी वे अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कम बारिश के कारण पौधे सूख सकते हैं। गढ़वा के किसान भूषण सिंह ने कहा कि जिले में अब तक हुई कम बारिश को लेकर कृषक चिंतित हैं। 

उन्होंने कहा, हम धान की पौध के लिए नर्सरी भी तैयार नहीं कर पाए हैं। आमतौर पर इस समय तक नर्सरी और खेत तैयार हो जाते हैं तथा जुलाई के पहले सप्ताह से रोपाई शुरू हो जाती है। लातेहार जिले के गारू प्रखंड के किसान मनोरंजन किशन ने बताया कि वह भी खरीफ मौसम के लिए अपने खेत तैयार नहीं कर पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को सरकार की ओर से धान के बीज भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। 

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा था लेकिन उसके कमजोर पड़ने कारण 23 जून तक यह राज्य के 24 में से केवल 22 जिलों तक ही पहुंच सका। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, फिलहाल झारखंड में मानसून कमजोर है। हमें उम्मीद है कि अगले दो-तीन दिनों में यह शेष दो जिलों-गढ़वा और पलामू को भी कवर कर लेगा। 

26 जून के बाद मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। झारखंड में गढ़वा और साहिबगंज सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं, जहां बारिश क्रमशः 99 प्रतिशत और 98 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। रांची और दुमका को छोड़कर राज्य के अन्य सभी जिलों में 41 से 99 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है, जबकि 16 जिलों में यह कमी 60 प्रतिशत से अधिक है। राज्य में 23 जून तक औसत 122.6 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 49.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। 

आनंद ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के शोध निदेशक पी.के. सिंह ने कहा, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खरीफ सीजन किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हम उन्हें धान के बजाय कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं। 

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उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार के लिए इस स्थिति से निपटने हेतु एक आकस्मिक योजना भी तैयार की है। झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए मडुआ, मक्का और दलहन जैसी जलवायु-अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है। 

उन्होंने कहा, किसानों की आय में स्थिरता लाने और संभावित आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन तथा वन-उत्पाद आधारित अन्य गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान के साथ हुई ऑनलाइन माध्यम से हुई बैठक में तिर्की ने औसत से कम वर्षा वाले जिलों के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज देने का आग्रह किया। 

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