Edited By Rohini Oberoi,Updated: 24 Jun, 2026 02:29 PM

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में चीन ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर्स की वैश्विक रैंकिंग 'TOP500' (जून 2026 एडिशन) में चीन के 'लाइनशाइन' (LineShine) सिस्टम ने अमेरिका को पछाड़कर पहला...
China LineShine Supercomputer : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में चीन ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर्स की वैश्विक रैंकिंग 'TOP500' (जून 2026 एडिशन) में चीन के 'लाइनशाइन' (LineShine) सिस्टम ने अमेरिका को पछाड़कर पहला स्थान हासिल कर लिया है। चीन ने तीन साल बाद इस लिस्ट में वापसी की है।
हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह रैंकिंग चीन की वास्तविक AI ताकत से ज्यादा, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच बीजिंग की 'चिप आत्मनिर्भरता' दिखाने की कोशिश को बयां करती है। बता दें कि शेनझेन स्थित नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में मौजूद 'लाइनशाइन' सुपरकंप्यूटर की यह जीत कई मायनों में खास है। अमेरिकी प्रतिबंधों को धता बताते हुए चीन ने इस सुपरकंप्यूटर में पूरी तरह से घरेलू स्तर पर डिजाइन किए गए चिप्स का इस्तेमाल किया है।
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चीन के इस सिस्टम ने अमेरिका के 'एल कैपिटन' (El Capitan) को दूसरे नंबर पर धकेल दिया है। एल कैपिटन को लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटरी में रखा गया है जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सरकार अपने परमाणु हथियारों के रखरखाव और रिसर्च के लिए करती है। चीन की इस कामयाबी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं जिसका उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग के उभरते क्षेत्र में अमेरिका को चीन से आगे बनाए रखना है।