Edited By Anu Malhotra,Updated: 12 Mar, 2026 07:41 AM

कानपुर के एक एयरफोर्स जवान के लिए बीता सात साल का वक्त किसी बुरे सपने से कम नहीं था, और विडंबना देखिए कि इस पूरी कानूनी जंग की बुनियाद भी एक 'सपना' ही थी। जिसे छेड़छाड़ समझकर पूरे परिवार ने पुलिस बुला ली और जवान को जेल भिजवा दिया, वह महज एक मानसिक...
नेशनल डेस्क: कानपुर के एक एयरफोर्स जवान के लिए बीता सात साल का वक्त किसी बुरे सपने से कम नहीं था, और विडंबना देखिए कि इस पूरी कानूनी जंग की बुनियाद भी एक 'सपना' ही थी। जिसे छेड़छाड़ समझकर पूरे परिवार ने पुलिस बुला ली और जवान को जेल भिजवा दिया, वह महज एक मानसिक भ्रम निकला। अब अदालत ने 7 साल की चली आ रही लंबी लड़ाई के इस अजीबोगरीब मामले में फैसला सुनाते हुए जवान को बाइज्जत बरी कर दिया है।
आधी रात का शोर और सात साल की प्रताड़ना
कहानी की शुरुआत साल 2019 में अनुराग शुक्ला की शादी के ठीक बाद हुई। खुशियों का माहौल तब मातम में बदल गया जब शादी के चंद दिनों बाद ही अनुराग की नाबालिग साली ने उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। मार्च की एक रात अचानक चीख-पुकार मची और साली ने दावा किया कि उसके जीजा ने उसके साथ गलत हरकत की है। सगी बहन ने भी अपनी बहन की बात पर भरोसा किया और पुलिस को सूचना दे दी। देखते ही देखते मामला दर्ज हुआ और देश की सेवा करने वाले एक जवान को 19 दिन सलाखों के पीछे गुजारने पड़े। सामाजिक प्रतिष्ठा धूल में मिल गई और करियर पर भी तलवार लटक गई।
जब कोर्ट में खुली 'ख्वाब' की हकीकत
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब पीड़िता (साली) गवाही देने कटघरे में खड़ी हुई, तो उसने जो कहा उसने सबको हैरान कर दिया। उसने स्वीकार किया कि उस रात उसने एंटीबायोटिक दवाएं ली थीं, जिसकी वजह से वह गहरी और नशे जैसी नींद में थी। नींद में उसे सपना आया कि कोई उसे दबोच रहा है और उसने हड़बड़ाहट में शोर मचा दिया। होश आने पर उसे लगा कि सामने खड़े जीजा ने ही ऐसा किया होगा। कोर्ट के सामने उसने साफ तौर पर माना कि असलियत में कोई छेड़छाड़ हुई ही नहीं थी, वह महज एक दवा के असर से पैदा हुआ भ्रम था।
साजिश या गलतफहमी?
एक तरफ जहां साली ने इसे सपना बताया, वहीं आरोपी अनुराग शुक्ला ने इस पूरी कहानी के पीछे एक गहरी साजिश का अंदेशा जताया। अनुराग के मुताबिक, उनके ससुर उन पर संपत्ति को पत्नी और साली के नाम करने का दबाव बना रहे थे। जब उन्होंने इससे इनकार किया, तो इस पारिवारिक विवाद को छेड़छाड़ के झूठे केस की शक्ल दे दी गई। कोर्ट ने पीड़िता के यू-टर्न और परिवार के बदलते बयानों को देखते हुए अनुराग को निर्दोष पाया। हालांकि उन्हें इंसाफ तो मिल गया, लेकिन उनके जीवन के वो सात साल और प्रमोशन का अवसर कभी लौटकर नहीं आएगा जो इस "सपनों के विवाद" की भेंट चढ़ गए।