चंद्र ग्रहण 2026: चंद्रगहण के दौरान भी बंद नहीं होगा ये मंदिर, ग्रहण के दौरान चलेगा अखंड हवन और भंडारा

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 02:13 PM

madhya pradesh temple will not be closed during lunar eclipse

साल 2026 का पहला और सबसे बड़ा पूर्ण चंद्र ग्रहण आज यानी मंगलवार, 3 मार्च को लगने जा रहा है। भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देने वाले इस खगोलीय घटनाक्रम के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश के तमाम प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए...

 Chandra grahan 2026: साल 2026 का पहला और सबसे बड़ा पूर्ण चंद्र ग्रहण आज यानी मंगलवार, 3 मार्च को लगने जा रहा है। भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देने वाले इस खगोलीय घटनाक्रम के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश के तमाम प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। जहाँ एक ओर अयोध्या के राम मंदिर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थानों पर सूतक काल के चलते दर्शन वर्जित हैं, वहीं मध्य प्रदेश का एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ ग्रहण का कोई भी प्रभाव मान्य नहीं होता।

दादाजी धूनीवाले मंदिर: जहाँ ग्रहण भी बेअसर है

मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित प्रसिद्ध 'अवधूत संत दादाजी धूनीवाले' का मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। जब पूरी दुनिया में सूतक और ग्रहण के नियमों का पालन किया जा रहा है, तब भी इस मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे खुले रहेंगे। यहाँ न तो आरती रुकती है और न ही दर्शन। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, दादाजी के समय से ही यहाँ ग्रहण के दौरान भी अखंड हवन, भोग और भंडारा निरंतर जारी रखने की परंपरा चली आ रही है।

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राम मंदिर और ओंकारेश्वर में बदला शेड्यूल

ग्रहण के सूतक काल का असर अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है:

  • अयोध्या: रामनगरी के लगभग सभी प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं। रामलला के साथ-साथ हनुमानगढ़ी और दशरथ महल में भी श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकेंगे।

  • ओंकारेश्वर: ज्योतिर्लिंग मंदिर दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक बंद रहेगा। ग्रहण के पश्चात शुद्धिकरण और सफाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रात 8:00 बजे से दर्शन दोबारा शुरू होंगे।

क्यों खास है आज का ग्रहण?

खगोलविदों और ज्योतिषियों के अनुसार, यह 2026 का सबसे बड़ा पूर्ण चंद्र ग्रहण है। भारत में इसकी दृश्यता होने के कारण ही धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों पर भारी बदलाव किए गए हैं। ऐसे में खंडवा का दादाजी मंदिर अपनी अटूट आस्था और विशिष्ट परंपरा के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

 

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