Edited By Mehak,Updated: 03 Mar, 2026 03:53 PM

हाल ही में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच चीन ने ईरान की सैन्य क्षमता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खुले हथियार सौदे से इनकार के बावजूद, चीन ने ईरान को CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल, HQ-9B मिसाइल डिफेंस सिस्टम, YLC-8B रडार,...
इंटरनेशनल डेस्क : बीते कुछ समय से ईरान और इज़राइल के बीच सीधा युद्ध जैसी स्थिति बन गई है, जिसमें अमेरिका भी इज़राइल के साथ मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई और मिसाइल हमले कर रहा है। इन हमलों के जवाब में ईरान ने मिसाइलें और ड्रोन चलाए हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है और आम नागरिकों को भी भारी क्षति हुई है। 28 फरवरी को संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत भी हो गई। यह संघर्ष अब कई देशों और गुटों तक फैल चुका है और इससे वैश्विक स्तर पर राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा‑संबंधी चिंताएं उठ रही हैं।
ऐसे समय में चीन ने अमेरिका और इज़राइल की हमलों की कड़ी निंदा की है। हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ सीधे हथियार सौदे से इनकार किया है, लेकिन एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनीतिक जोखिमों की वजह से चीन और ईरान के बीच खुले तौर पर बड़े हथियार सौदे कम देखने को मिलते हैं। फिर भी चीन ने ईरान को गुप्त तरीके से मदद पहुंचाई है। सीधे तैयार हथियार भेजने की बजाय, चीन ने उन्हें पुर्जों के रूप में हथियार दिए हैं और उनकी असेंबली में तकनीकी सहयोग भी मुहैया कराया।
CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल
चीन ने ईरान को CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल देने की खबरों में सबसे ज्यादा चर्चा रही। यह मिसाइल बड़े नौसैनिक जहाजों जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है। इसकी मारक क्षमता 290 से 460 किलोमीटर तक है और 500 किलो का वारहेड लगाया जा सकता है। मिसाइल समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ती है, जिससे इसे पकड़ना मुश्किल होता है। अगर ईरान को यह प्रणाली मिलती है, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना के लिए खतरा बढ़ सकता है।
HQ-9B लंबी दूरी की मिसाइल रक्षा प्रणाली
ईरान की रणनीतिक वायु और मिसाइल रक्षा को मजबूत करने के लिए HQ-9B सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी भेजी गई। इसे परमाणु ठिकानों, बड़े शहरों और सैन्य अड्डों को हवाई हमलों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी मारक दूरी 200 से 260 किलोमीटर बताई जाती है और इसे चीन के उन्नत सिस्टम के रूप में रूस के S-300 या S-400 के बराबर माना जाता है।
YLC-8B UHF सर्विलांस रडार
ईरान की वायु रक्षा को मजबूत करने में YLC-8B UHF लंबी दूरी का 3D सर्विलांस रडार भी शामिल है। यह स्टेल्थ विमानों जैसे F-35 और B-2 को पकड़ने में सक्षम है। 2025 से इसकी सप्लाई शुरू हुई और कई यूनिट्स ईरान के नेटवर्क में जोड़ी गई। यह रडार समय रहते चेतावनी देने और मिसाइलों का पता लगाने में मदद करता है।
मिसाइल ईंधन और पुर्जों की सप्लाई
रिपोर्ट में मिसाइल ईंधन से जुड़े रसायनों जैसे सोडियम परक्लोरेट और अमोनियम परक्लोरेट का भी जिक्र है। फरवरी 2025 में लगभग 1,000 टन सोडियम परक्लोरेट ईरान पहुंचाई गई, जो 200–300 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए पर्याप्त है। इन मिसाइलों का इस्तेमाल सटीक हमलों और सहयोगी समूहों के समर्थन के लिए किया जा सकता है।
ड्रोन, MANPADS और अन्य तकनीक
ईरान को आत्मघाती ड्रोन, MANPADS (कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल), एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम और एंटी-सैटेलाइट तकनीक की भी आपूर्ति की गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार चीन ने खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) तकनीकी मदद भी दी। इससे ईरान अपने युद्ध-पूर्व मिसाइल भंडार और वायु रक्षा को फिर से मजबूत कर रहा है।