मकर संक्रांति पर महाकुंभ का श्रीगणेश, हरिद्वार में लोगों ने गंगा जी में लगाई आस्था की डुबकी

Edited By Seema Sharma,Updated: 14 Jan, 2021 10:54 AM

mahakumbh start on makar sankranti

देशभर में गुरुवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया गया, इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है और मकर राशि में प्रवेश करता है। वहीं मकर संक्रांति पर स्नान के साथ ही आज से हरिद्वार महाकुंभ का भी श्रीगणेश हो रहा है। आज सुबह-सुबह लोगों ने हरिद्वार में गंगा में...

नेशनल डेस्क: देशभर में गुरुवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया गया, इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है और मकर राशि में प्रवेश करता है। वहीं मकर संक्रांति पर स्नान के साथ ही आज से हरिद्वार महाकुंभ का भी श्रीगणेश हो रहा है। आज सुबह-सुबह लोगों ने हरिद्वार में गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। वहीं खबर है कि महाकुंभ पर गंगा में शाही स्नान के लिए पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है। महाकुंभ के स्नान के लिए हरिद्वार में बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है।

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महाकुंभ पर स्पेशल ट्रेन
महाकुंभ पर रेलवे की तरफ से स्पेशल ट्रेन शुरू की गई है। महाकुंभ में बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए पूर्व-मध्य रेल (ECR) 12 जनवरी से तीन जोड़ी विशेष ट्रेन चलाएगी। महाकुंभ के मद्देनजर 12 जनवरी से 2 मई 2021 तक पटना और धनबाद के रास्ते हावड़ा से देहरादून और योगनगरी ऋषिकेष के बीच तीन जोड़ी विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है।

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कुंभ पर चार शाही स्नान
महाकुंभ पर चार शाही स्नान होंगे लेकिन इसके अलावा मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (11 फरवरी), बसंत पंचमी (16 फरवरी), माघ पूर्णिमा (27 फरवरी) और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (13 अप्रैल) और रामनवमी (21 अप्रैल) साल के इन छह दिन पर भी स्नान करने के अनुष्ठान को निभाने की परंपरा है। पहला शाही स्नान महाशिवरात्रि के अवसर पर 11 मार्च को होगा। बता दें कि इस बार कुंभ मेला 48 दिन का है। ग्रहों की चाल के चलते इस बार कुंभ 12 के बजाए 11वें साल में पड़ रहा है। 83 साल बाद पहली बार 12 साल से कम समय में कुंभ का योग बना है।

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शुभ कार्य होंगे फिर से शुरू
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास का समापन हो जाता है और शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान पुण्य करने का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति पर उत्तर भारत में हर साल घरों में खिचड़ी बनाने की परंपरा है और इसलिए इस त्योहार का एक नाम खिचड़ी भी है। इस त्योहार पर देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने की भी परंपरा है और इसलिए इसे पतंग पर्व भी कहा जाता है।

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