Edited By Radhika,Updated: 05 Mar, 2026 03:21 PM

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरानी नौसैनिक पोत 'आईरिस देना' के मामले में भारत सरकार की 'रणनीतिक चुप्पी' देश की साख पर सवाल खड़े करती है और भारत की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की 'जी-हुजूरी' में।...
नेशनल डेस्क: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरानी नौसैनिक पोत 'आईरिस देना' के मामले में भारत सरकार की 'रणनीतिक चुप्पी' देश की साख पर सवाल खड़े करती है और भारत की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की 'जी-हुजूरी' में। गहलोत ने यह भी कहा कि भारत को अपनी स्वायत्तता और मेहमान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा। उन्होंने एक बयान में कहा, "(जवाहर लाल) नेहरू जी के गुट निरपेक्ष आंदोलन से लेकर इंदिरा (गांधी) जी की निडर कूटनीति तक, भारत कभी किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं झुका।''
गहलोत ने कहा, ''हम सभी को 2013 का देवयानी खोबरागड़े मामला भी याद करना चाहिए, जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों की सुविधाएं छीनकर 'जैसे को तैसा' जवाब दिया था।'' उन्होंने कहा, "भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश के दबाव में आकर अपनी संप्रभुता एवं नीतियों से समझौता नहीं किया।" पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "परंतु हमारे ही समुद्री पड़ोस में 'मिलन 2026' के मेहमान 'आईरिस देना' का शिकार होना और हमारी 'रणनीतिक चुप्पी' भारत की साख पर सवाल उठाती है। अमेरिका की इस मनमानी पर चुप रहना 'अतिथि देवो भव' के हमारे संस्कारों और सैन्य गौरव के खिलाफ है।"

ईरानी पोत 'आईरिस देना' हाल में भारत द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास 'मिलन 2026' में शामिल हुआ था। इसे श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा कथित रूप से हमला कर डुबो दिया गया। गहलोत ने कहा, ''हिंद महासागर का 'असली रक्षक' कहलाने वाले भारत की चुप्पी क्या कूटनीतिक दबाव का संकेत है?'' उन्होंने कहा कि एक उभरती महाशक्ति को अपने क्षेत्र में होने वाली ऐसी हिंसक घटनाओं पर ''मूकदर्शक'' नहीं बने रहना चाहिए, अगर हम हिंद महासागर के असली रक्षक हैं, तो हमें अपनी स्वायत्तता और मेहमान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा।